Zepto समेत कई ई-कॉमर्स कंपनियों ने बंद की Glue Traps की बिक्री, जानवरों के प्रति क्रूरता रोकने के लिए PETA India की मुहिम
Maharashtra: ऑनलाइन सामान बेचने वाले प्लेटफॉर्म Zepto ने अब अपने ऐप और वेबसाइट से ग्लू ट्रैप (चिपकाने वाले जाल) हटा दिए हैं। PETA India के हस्तक्षेप के बाद यह फैसला लिया गया है क्योंकि ये उत्पाद देश के ज्यादातर हिस्सों म
Maharashtra: ऑनलाइन सामान बेचने वाले प्लेटफॉर्म Zepto ने अब अपने ऐप और वेबसाइट से ग्लू ट्रैप (चिपकाने वाले जाल) हटा दिए हैं। PETA India के हस्तक्षेप के बाद यह फैसला लिया गया है क्योंकि ये उत्पाद देश के ज्यादातर हिस्सों में बैन हैं। इन जालों में फंसने के बाद जानवरों की बहुत दर्दनाक मौत होती है।
पेटा इंडिया ने कई बड़ी कंपनियों से संपर्क किया था जिसके बाद Amazon India, Flipkart, Meesho, Snapdeal और JioMart ने भी इन प्रोडक्ट्स को अपनी लिस्टिंग से हटा दिया था। अब Zepto ने भी इसी राह पर चलते हुए इनकी बिक्री बंद कर दी है। हालांकि, PETA India अभी भी BigBasket और IndiaMART से इन क्रूर जालों को हटाने की मांग कर रहा है।
इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पाया कि 2020 में बैन लगाए जाने के बावजूद मार्च 2026 के सर्वे में ये जाल बाजार में बिकते मिले। इसके बाद गुजरात सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस कमिश्नरों को आदेश दिया कि वे ग्लू ट्रैप की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाएं और नियमों का सख्ती से पालन कराएं।
सरकारी नियमों के मुताबिक, भारत के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्लू ट्रैप बैन हैं। इनका इस्तेमाल ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960’ की धारा 11 का उल्लंघन है, जो जानवरों को अनावश्यक दर्द देने से मना करता है। साथ ही यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के भी खिलाफ है। अगर कोई व्यक्ति या दुकान इनका इस्तेमाल या बिक्री करती पकड़ी जाती है, तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है या तीन महीने तक की जेल हो सकती है।
दिल्ली, कर्नाटक और बिहार जैसे राज्यों के पशुपालन निदेशालय ने भी इन जालों के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किए हैं। गुजरात सरकार ने इसके लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 का हवाला दिया है, जिसके तहत सरकारी आदेशों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।