World: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा दो हफ्ते का युद्धविराम काफी नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने शांति की दिशा में अगला कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका के पास युद्
World: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा दो हफ्ते का युद्धविराम काफी नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने शांति की दिशा में अगला कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका के पास युद्ध में लौटने के लिए बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता में 7 अप्रैल 2026 को एक अस्थायी शांति समझौता हुआ था। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वे अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं और ईरान को जल्द फैसला लेना होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की मुख्य शर्तें क्या हैं?
- अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के सामने ‘Strait of Hormuz’ को पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खोलने की शर्त रखी है।
- ईरान ने जवाब में एक 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया था, जिसे बाद में ट्रंप ने ‘पर्याप्त नहीं’ बताते हुए खारिज कर दिया।
- ईरान की मांगों में सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और इलाके से अमेरिकी सेना की वापसी जैसे मुद्दे शामिल थे।
- अमेरिका का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश में है, जो उनके लिए एक ‘रेड लाइन’ की तरह है।
- ईरान यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार पर अड़ा हुआ है, जो बातचीत में बड़ी बाधा बना हुआ है।
आगामी वार्ताओं और युद्धविराम की वर्तमान स्थिति क्या है?
व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि 10 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक बड़ी बैठक होगी। इस बातचीत का नेतृत्व खुद उपराष्ट्रपति JD Vance करेंगे और उनके साथ Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे बड़े अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। हालांकि सीजफायर की घोषणा के बाद भी कुछ इलाकों में हिंसा की खबरें आई हैं। ईरान की एक तेल रिफाइनरी पर हमले की बात सामने आई है और कुवैत व संयुक्त अरब अमीरात ने भी हवाई हमलों की जानकारी दी है। इसके अलावा इजरायल ने साफ कर दिया है कि लेबनान में उसके सैन्य अभियान इस युद्धविराम का हिस्सा नहीं हैं।
वैश्विक बाजार और आम जनता पर इस तनाव का क्या असर होगा?
जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की खबर आई, कच्चा तेल यानी Crude Oil की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर भी दिखा और वहां अच्छी बढ़त देखने को मिली। अमेरिका का कहना है कि उनके सैन्य अभियान ‘Operation Epic Fury’ ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता को काफी हद तक खत्म कर दिया है। अगर आगामी शनिवार को होने वाली बातचीत सफल नहीं होती है, तो तेल की कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं।