Bihar: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु को लेकर पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा है। 3 मई 2026 की रात पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में गिर गया था, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार का संपर्क टूट गया था। अब यहाँ बेली ब्रिज बनाकर यातायात फि
Bihar: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु को लेकर पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा है। 3 मई 2026 की रात पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में गिर गया था, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार का संपर्क टूट गया था। अब यहाँ बेली ब्रिज बनाकर यातायात फिर से शुरू कर दिया गया है और पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने पुल की सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
विक्रमशिला सेतु पर अभी क्या नियम हैं और कौन से वाहन चल सकते हैं
पुल पर फिलहाल छोटे वाहनों के लिए रास्ता खुला है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। यहाँ वन-वे सिस्टम लागू है, जिसमें हर 15 मिनट के अंतराल पर बारी-बारी से गाड़ियां गुजर रही हैं। बसों, ट्रकों और भारी व्यावसायिक वाहनों के चलने पर पूरी तरह रोक है। साथ ही, जब तक व्यवस्था पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों से कोई टोल टैक्स या शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पुल की सुरक्षा और मरम्मत को लेकर क्या है अपडेट
मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने कहा कि एक्सपेंशन जॉइंट में गैप बढ़ने की खबरें सही नहीं हैं और पुल सुरक्षित है। ड्रोन से इसकी रोजाना निगरानी की जा रही है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट में तकनीकी खामियों की बात कही गई है, जिस पर मुख्य अभियंता संजय भारती ने जांच के आदेश दिए हैं। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत में करीब तीन महीने का समय लग सकता है। साथ ही, समानांतर बन रहे फोरलेन पुल का काम तेजी से चल रहा है, जिसका 50% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है।
| मुख्य बिंदु |
विवरण |
| बेली ब्रिज उद्घाटन |
7 जून, 2026 |
| ट्रैफिक सिस्टम |
वन-वे (15 मिनट अंतराल) |
| प्रतिबंधित वाहन |
बस, ट्रक और भारी वाहन |
| निगरानी का तरीका |
ड्रोन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी |
| फोरलेन पुल स्थिति |
50.15% कार्य पूर्ण (9 जून तक) |
| मरम्मत बजट |
100 करोड़ रुपये की परियोजना |
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या विक्रमशिला सेतु पर भारी वाहन चल सकते हैं
नहीं, सुरक्षा कारणों से बसों, ट्रकों और अन्य भारी व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगी हुई है।
पुल पर यातायात की क्या व्यवस्था है
पुल पर अभी वन-वे सिस्टम लागू है, जिसमें छोटे वाहनों को हर 15-15 मिनट के अंतराल पर बारी-बारी से गुजरने दिया जा रहा है।