US और Iran के बीच बातचीत पर संशय, ईरान ने तकनीकी मीटिंग की खबरों को नकारा
World: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच एक नया मोड़ आया है। ईरान ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है जिनमें कहा गया था कि इस हफ्ते दोनों देशों के तकनीकी समूह आपस में मीटिंग करने वाले हैं। इस इनकार क
World: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच एक नया मोड़ आया है। ईरान ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है जिनमें कहा गया था कि इस हफ्ते दोनों देशों के तकनीकी समूह आपस में मीटिंग करने वाले हैं। इस इनकार के बाद अब कूटनीतिक कोशिशों पर अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में हमले और जवाबी हमले जारी थे।
ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काज़ेम ग़रीब आबादी ने सोमवार, 29 जून 2026 को साफ किया कि अमेरिका के साथ किसी औपचारिक तकनीकी बैठक का कोई प्रोग्राम नहीं है। उन्होंने बताया कि कतर के साथ बातचीत अभी भी चल रही है, लेकिन तकनीकी चर्चा तभी होगी जब तय शर्तें पूरी होंगी और तारीख व जगह पर सहमति बनेगी। वहीं, ईरान के एक अन्य अधिकारी मेहदी फज़ायली ने कहा कि रविवार को होने वाली मीटिंग में ईरान ने हिस्सा नहीं लिया क्योंकि अमेरिका ने जमी हुई रकम को रिलीज करने जैसी शर्तों को पूरा नहीं किया था।
दूसरी तरफ, अमेरिका के सीनियर अधिकारियों ने जेरूसलम पोस्ट को बताया कि कोई भी मीटिंग कैंसिल नहीं हुई है और MoU (समझौता ज्ञापन) को लागू करने की बातचीत पटरी पर है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, दोनों देश मंगलवार, 30 जून 2026 को कतर में मिल सकते हैं ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के विवाद को सुलझाया जा सके और जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।
इस पूरे मामले में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। बता दें कि 17 जून 2026 को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘इस्लामाबाद MoU’ पर हस्ताक्षर किए थे ताकि सैन्य अभियान रोके जा सकें। इसी बीच, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने घोषणा की कि कतर के जरिए ईरान की 6 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति रिलीज की जाएगी, जिससे जनता के बीच इस अंतरिम समझौते का समर्थन बढ़ सके।
तनाव की बात करें तो 17 जून के समझौते के बावजूद दोनों पक्षों के बीच झड़पें हुई हैं। पिछले गुरुवार को एक कार्गो शिप पर ईरानी हमला हुआ था, जिसके जवाब में रविवार सुबह अमेरिका ने ईरान के 10 ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया है।