US और Iran के बीच फिर शुरू होंगी बातचीत, हमले रोकने पर बनी सहमति, Doha में होगी अगली मीटिंग
World : अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहा तनाव अब थोड़ा कम होता दिख रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर होने वाले हमलों को रोकने और फिर से बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प
World : अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहा तनाव अब थोड़ा कम होता दिख रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर होने वाले हमलों को रोकने और फिर से बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले हफ्ते हुए जवाबी हमलों की वजह से दोनों के बीच हुआ समझौता टूटने की कगार पर था।
दरअसल, 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक समझौता (MOU) किया था। इस समझौते का मकसद युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर 60 दिनों के भीतर बातचीत पूरी करना था। लेकिन पिछले वीकेंड में हालात बिगड़ गए। US Central Command ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला बोल दिया।
इस तनाव के बीच अब कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देश फिर से मेज पर आ रहे हैं। पहले यह बातचीत स्विट्जरलैंड में होनी थी, लेकिन अब इसे 30 जून को Doha, Qatar में किया जाएगा। इस मीटिंग का मुख्य फोकस Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) के विवाद को सुलझाने पर रहेगा, ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सके।
समझौते की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| समझौता तिथि | 17 जून 2026 |
| समय सीमा | 60 दिनों का रोडमैप (लक्ष्य 17 अगस्त 2026) |
| प्रमुख शर्तें | सैन्य अभियान रोकना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नेवल ब्लॉकेड हटाना |
| राहत | ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में कुछ छूट |
| निगरानी | IAEA निरीक्षकों की ईरान में वापसी पर सहमति |
| मध्यस्थ देश | कतर और पाकिस्तान |
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अब दोनों पक्ष पीछे हटेंगे और तकनीकी बातचीत जारी रहेगी ताकि जहाजों की आवाजाही बिना किसी डर के हो सके। हालांकि, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया, तो वह सारी कूटनीतिक प्रक्रियाएं बंद कर देगा। वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सख्त लहजे में कहा था कि अगर ईरान नहीं माना तो वह सैन्य कार्रवाई पूरी करेंगे।