Maharashtra: मुंबई के एक थिंक टैंक में काम करने वाली अमेरिकी महिला ने अपने साथ हो रहे भेदभाव का आरोप लगाया है। यह महिला 40 साल से ऊपर की हैं और एक सीनियर विजिटिंग फेलो के तौर पर वहां आई हैं। उनका कहना है कि संस्था के हेड
Maharashtra: मुंबई के एक थिंक टैंक में काम करने वाली अमेरिकी महिला ने अपने साथ हो रहे भेदभाव का आरोप लगाया है। यह महिला 40 साल से ऊपर की हैं और एक सीनियर विजिटिंग फेलो के तौर पर वहां आई हैं। उनका कहना है कि संस्था के हेड उन्हें एक इंटर्न की तरह ट्रीट कर रहे हैं, जबकि उनकी पूरी फंडिंग अमेरिका की एक संस्था कर रही है।
महिला ने क्या आरोप लगाए हैं?
महिला ने Reddit पर अपनी परेशानी साझा की है। उनके मुताबिक, अमेरिका और भारतीय संस्था के बीच हुए समझौते (MOU) के तहत उन्हें हफ्ते में सिर्फ तीन दिन ऑफिस आना था। लेकिन अब उनसे जूनियर स्टाफ और इंटर्न्स की तरह व्यवहार किया जा रहा है। उन्हें बीमारी की वजह से देर से आने पर भी HR विभाग को रिपोर्ट करने के लिए कहा जाता है, जो उनके अनुभव और पद के हिसाब से सही नहीं है।
नियमों और सुविधाओं में क्या है अंतर?
महिला ने बताया कि संस्था में उनकी उम्र के अन्य कर्मचारियों को हाइब्रिड वर्क (घर और ऑफिस दोनों से काम) की सुविधा मिलती है, लेकिन उन्हें यह नहीं दी जा रही। उनकी स्थिति को समझने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें:
| विवरण |
समझौते (MOU) के अनुसार |
वर्तमान स्थिति (आरोप) |
| ऑफिस उपस्थिति |
हफ्ते में 3 दिन |
इंटर्न्स की तरह सख्त नियम |
| संस्था की भूमिका |
सपोर्ट और ऑफिस स्पेस देना |
जूनियर स्टाफ जैसा ट्रीटमेंट |
| वर्क शेड्यूल |
लचीला समय |
HR को रिपोर्ट करना अनिवार्य |
आगे क्या हो सकता है?
इस मामले की जानकारी Hindustan Times ने 14 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की। Reddit पर अन्य लोगों ने उन्हें सलाह दी है कि वह इस मुद्दे को अपनी फंडिंग देने वाली अमेरिकी संस्था के सामने उठाएं। महिला ने यह भी बताया कि प्रदूषण और तनाव की वजह से उनकी सेहत खराब रहती है, जिससे उनके लिए लंबे समय तक ऑफिस में रहना मुश्किल हो रहा है।