Middle East में अमेरिका बना देगा ड्रोन टास्क फोर्स, Task Force Falcon Strike के जरिए बढ़ेगी सुरक्षा
World: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट इलाके में सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय ड्रोन टास्क फोर्स बनाया है। इसका नाम Task Force Falcon Strike (TFFS) रखा गया है। US Central Command (CENTCOM) ने 13-14 अगस्त 2026 को इसकी
World: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट इलाके में सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय ड्रोन टास्क फोर्स बनाया है। इसका नाम Task Force Falcon Strike (TFFS) रखा गया है। US Central Command (CENTCOM) ने 13-14 अगस्त 2026 को इसकी घोषणा की। इस पहल का मकसद कई देशों को एक साथ लाकर ड्रोन तकनीक के जरिए इलाके की सुरक्षा को मजबूत करना है।
CENTCOM के कमांडर Admiral Brad Cooper ने बताया कि जब हम नई क्षमताओं को एक साथ जोड़कर तैनात करते हैं, तो हम ज्यादा मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि Task Force Falcon Strike को Task Force Scorpion Strike की कामयाबी के बाद लाया गया है। यह नया टास्क फोर्स क्षेत्रीय सहयोग और नई तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा के नए रास्ते खोलेगा।
इस टास्क फोर्स का नेतृत्व U.S. Special Operations Command Central (SOCCENT) के लोग करेंगे। इसमें अमेरिका के साथ-साथ इस क्षेत्र के अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। CENTCOM ने क्षेत्रीय साझेदार देशों से बात शुरू कर दी है और उन्हें इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, हालांकि अभी उन देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
Task Force Falcon Strike में कई तरह के ड्रोन इस्तेमाल किए जाएंगे। इसमें एक तरफा हमला करने वाले (one-way attack) ड्रोन शामिल होंगे जो हवा से, समुद्र की सतह पर और पानी के अंदर (UUVs) काम कर सकेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट में ड्रोन हमलों की क्षमता को बढ़ाना और एक मजबूत सुरक्षा तंत्र तैयार करना है।
बता दें कि इससे पहले दिसंबर 2025 में Task Force Scorpion Strike बनाया गया था। वह अमेरिका की पहली समर्पित वन-वे अटैक ड्रोन स्क्वाड्रन थी। उस टास्क फोर्स ने दिसंबर 2025 में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत से पहला अटैक ड्रोन लॉन्च किया था और जुलाई 2026 में ईरानी पोर्ट सुविधाओं पर किए गए हमलों में भी इसका इस्तेमाल हुआ था।