UP: बदायूं जिले के वजीरगंज विकासखंड से करीब 50 ग्राम प्रधान बस के जरिए लखनऊ के लिए रवाना हुए हैं। ये सभी प्रधान इको गार्डन में आयोजित होने वाले एक विशाल महासम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में प्रदेश भर से बड़ी संख्य
UP: बदायूं जिले के वजीरगंज विकासखंड से करीब 50 ग्राम प्रधान बस के जरिए लखनऊ के लिए रवाना हुए हैं। ये सभी प्रधान इको गार्डन में आयोजित होने वाले एक विशाल महासम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में प्रदेश भर से बड़ी संख्या में प्रधानों के जुटने की उम्मीद है, जहां वे अपनी समस्याओं और अधिकारों पर बात करेंगे।
प्रधानों की मुख्य मांगें और चिंताएं क्या हैं?
उत्तर प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है। अभी तक पंचायत चुनाव की तारीखें तय नहीं हुई हैं, जिससे प्रधानों के बीच अनिश्चितता है। प्रधान संगठनों की मांग है कि अगर समय पर चुनाव नहीं होते, तो उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए या उन्हें प्रशासक बनाया जाए। उन्हें डर है कि प्रशासकों के आने से गांवों के विकास कार्य रुक सकते हैं और पैसों की हेराफेरी बढ़ सकती है।
सरकार का क्या रुख है और क्या होगी कार्रवाई?
पंचायती राज विभाग ने कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति या प्रशासनिक समिति बनाने का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा है। पंचायती राज अधिनियम 1947 के तहत सरकार को यह अधिकार है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने आश्वासन दिया है कि सरकार प्रधानों के हितों का ख्याल रखेगी और समय पर चुनाव कराने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर, कुछ जिलों जैसे हाथरस और महाराजगंज में पुलिस ने कई प्रधानों को लखनऊ जाने से रोकने के लिए नजरबंद भी किया है।
सम्मेलन में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
लखनऊ के इको गार्डन में होने वाले इस सम्मेलन में ग्राम पंचायतों के अधिकारों और विकास कार्यों की रफ्तार पर जोर दिया जाएगा। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाना और प्रधानों के सम्मान की लड़ाई को एक बड़ा मंच देना इस बैठक का मुख्य उद्देश्य है। इसमें अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन और राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन जैसी संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
UP में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल कब समाप्त हो रहा है?
उत्तर प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।
प्रधानों को प्रशासक नियुक्त होने से क्यों डर लग रहा है?
प्रधानों को आशंका है कि प्रशासकों की नियुक्ति से गांवों में विकास की गति धीमी हो सकती है और वित्तीय अनियमितताएं बढ़ सकती हैं, जैसा कि 2021 में देखा गया था।