UP: संभल के असमोली ब्लॉक परिसर में मंगलवार रात करीब 10 बजे बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान इकट्ठा हुए। अखिल भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में ये प्रधान लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे
UP: संभल के असमोली ब्लॉक परिसर में मंगलवार रात करीब 10 बजे बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान इकट्ठा हुए। अखिल भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में ये प्रधान लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देना चाहते थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और मौके पर ही उनका ज्ञापन ले लिया।
ग्राम प्रधानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रधानों की सबसे बड़ी मांग है कि पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएं। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई, 2026 को खत्म हो रहा है। उनका कहना है कि अगर चुनाव में देरी होती है, तो वर्तमान प्रधानों को ही वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों के साथ प्रशासक बनाया जाए। वे सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त करने का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे गांव के विकास कार्य रुक जाएंगे और पैसों की हेराफेरी बढ़ सकती है।
चुनाव में देरी क्यों हो रही है और सरकार का क्या कहना है?
जानकारी के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण के मुद्दे और मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी की वजह से चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे हैं। अंतिम मतदाता सूची अब 10 जून, 2026 तक आने की उम्मीद है। इस बीच, लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे प्रधानों से उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उनके हितों का ख्याल रखेगी और समय पर चुनाव कराने की कोशिश करेगी।
प्रशासनिक समिति और पुराने विवाद
पंचायती राज विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा है कि यदि चुनाव नहीं हो पाते, तो प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल प्रशासनिक समिति के जरिए बढ़ाया जा सकता है। प्रधान संगठनों का तर्क है कि 2021 में प्रशासकों ने करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे, जिसका कोई सही हिसाब नहीं मिला। इसलिए वे अधिकारियों के बजाय खुद प्रशासक बनने की मांग कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल कब समाप्त हो रहा है?
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई, 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद नए चुनाव होने चाहिए।
पंचायत चुनाव में देरी का मुख्य कारण क्या है?
चुनाव में देरी का मुख्य कारण ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दे और मतदाता सूची के प्रकाशन में विलंब है। अब अंतिम सूची 10 जून, 2026 तक आने की उम्मीद है।