UP में कमजोर मानसून और सूखे का खतरा, अल नीनो के असर से फसलों पर पड़ेगा बुरा प्रभाव
UP: दुनिया भर में मौसम का मिजाज बदल रहा है और इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के किसानों और आम लोगों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने अल नीनो के कारण मानसून कमजोर होने और सूखे के खतरे की चेतावनी दी है। लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में
UP: दुनिया भर में मौसम का मिजाज बदल रहा है और इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के किसानों और आम लोगों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने अल नीनो के कारण मानसून कमजोर होने और सूखे के खतरे की चेतावनी दी है। लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में बारिश कम होने की आशंका है, जिससे जल संकट और खेती-किसानी पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने 1950 के बाद सबसे भीषण ‘सुपर अल नीनो’ की चेतावनी दी है। यह स्थिति 2026 के अंत तक और मजबूत हो सकती है और 2027 की शुरुआत तक बनी रह सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, इससे दुनिया के कई हिस्सों में लू, भारी बारिश और सूखे का खतरा बढ़ जाएगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी संकेत दिए हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की वजह से बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
उत्तर प्रदेश के लिए स्थिति और भी चिंताजनक है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में इस बार बारिश औसत के 90% से भी कम रह सकती है। हालात 2015 जैसे हो सकते हैं जब राज्य में आंशिक सूखे का सामना करना पड़ा था। जून में कम बारिश की वजह से खरीफ फसलों की बुवाई पहले ही प्रभावित हुई है।
कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा असर धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों पर पड़ेगा। इससे पैदावार घट सकती है और बाजार में महंगाई बढ़ सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, जून तक खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 23% कम रहा है।
केंद्र सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार ने 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार किया है और किसानों को कम पानी वाली फसलों को उगाने की सलाह दी है।
वहीं, लखनऊ के मौसम की बात करें तो 10 जुलाई को तापमान 28°C दर्ज किया गया, लेकिन उमस की वजह से यह 34°C जैसा महसूस हो रहा था। आने वाले दिनों में हल्की बारिश की संभावना है, लेकिन लंबे समय में मानसून की गतिविधि कमजोर होने का डर है। वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीकों पर भी काम कर रहे हैं जिससे समुद्र के ऊपर बादलों को चमकीला बनाकर अल नीनो के असर को कम किया जा सके।