UP: लखनऊ-वाराणसी नेशनल हाईवे पर एक दर्दनाक हादसा हुआ है जहां मुरली गांव के पास एक अज्ञात वाहन की चपेट में आने से राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत हो गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पत्रकारों ने तुरंत वन विभाग को सूचना
UP: लखनऊ-वाराणसी नेशनल हाईवे पर एक दर्दनाक हादसा हुआ है जहां मुरली गांव के पास एक अज्ञात वाहन की चपेट में आने से राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत हो गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पत्रकारों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी ताकि जरूरी कार्रवाई की जा सके।
कैसे हुआ हादसा और अब क्या है स्थिति
यह घटना लंभुआ क्षेत्र में लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर मुरली गांव के पास घटी। सड़क पार करते समय किसी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने मोर को टक्कर मार दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम को सूचित किया गया है।
मोर की मौत पर क्या कहता है कानून
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत मोर एक संरक्षित प्रजाति है। कानून के मुताबिक मोर का शिकार करना पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसे मारने वाले व्यक्ति को जेल और आर्थिक दंड दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। ऐसी घटनाओं में वन विभाग शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराता है ताकि मौत की असली वजह पता चल सके।
देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं
मोरों की मौत के मामले केवल यूपी तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में राजस्थान के भीलवाड़ा, डीडवाना और नागौर जैसे जिलों में 57 मोरों की हत्या का मामला सामने आया है। वहीं हरियाणा के पानीपत के मतलौडा क्षेत्र में भी 10 जून को मोर को मारने की घटना हुई थी, जिस पर वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत केस दर्ज किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मोर की मौत होने पर कौन सी कानूनी कार्रवाई होती है?
मोर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है। इसकी मौत के मामलों की जांच वन विभाग करता है और दोषी पाए जाने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
वन विभाग इस मामले में क्या प्रक्रिया अपनाता है?
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेती है और पोस्टमार्टम कराती है ताकि यह पता चल सके कि मौत दुर्घटना से हुई है या शिकार से।