UP: ककवन क्षेत्र में किसानों द्वारा गेहूं की फसल के अवशेष जलाए जाने का मामला सामने आया है। यह आग लखनऊ-इटावा राजमार्ग के किनारे लगी, जिससे आसपास के कई पेड़ झुलस गए। इस घटना से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा है और हाईवे से
UP: ककवन क्षेत्र में किसानों द्वारा गेहूं की फसल के अवशेष जलाए जाने का मामला सामने आया है। यह आग लखनऊ-इटावा राजमार्ग के किनारे लगी, जिससे आसपास के कई पेड़ झुलस गए। इस घटना से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा है और हाईवे से गुजरने वाले लोगों को भी परेशानी हुई।
फसल जलाने से पर्यावरण पर क्या असर पड़ा?
खेतों में पराली और फसल अवशेष जलाने की वजह से हाईवे के किनारे लगे हरे-भरे पेड़ झुलस गए। इससे न केवल हरियाली खत्म हुई बल्कि हवा में धुआं फैलने से प्रदूषण भी बढ़ा। स्थानीय स्तर पर पर्यावरण को होने वाला यह नुकसान चिंता का विषय बना हुआ है।
सरकारी आंकड़े और CAQM की गाइडलाइन्स क्या कहती हैं?
Commission for Air Quality Management (CAQM) ने फसल अवशेष जलाने को रोकने के लिए राज्यों की तैयारी की समीक्षा की है। आंकड़ों के मुताबिक, 20 अप्रैल 2026 तक उत्तर प्रदेश में फसल जलाने के 7,920 मामले दर्ज किए गए थे। साल 2022 से अब तक UP में कुल 53,911 केस सामने आए हैं। CAQM ने राज्यों को 11 मई 2026 तक संशोधित एक्शन प्लान जमा करने का निर्देश दिया था और गेहूं की फसल के अवशेषों के प्रबंधन के लिए निर्देश संख्या 96 जारी किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
UP में फसल जलाने के कितने मामले सामने आए हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 अप्रैल 2026 तक उत्तर प्रदेश में 7,920 मामले दर्ज थे और साल 2022 से अब तक कुल 53,911 मामले सामने आए हैं।
CAQM ने फसल अवशेषों के लिए क्या निर्देश दिए हैं?
CAQM ने राज्यों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सख्त कदम उठाने और 11 मई 2026 तक संशोधित एक्शन प्लान जमा करने को कहा है।