UP : उत्तर प्रदेश के गांवों में ग्राम प्रधानों के कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें ही प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Lucknow Bench) ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव की
UP : उत्तर प्रदेश के गांवों में ग्राम प्रधानों के कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें ही प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Lucknow Bench) ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव की निश्चित तारीखें मांगी हैं। यह मामला तब शुरू हुआ जब 26 मई 2026 को प्रधानों का 5 साल का कार्यकाल पूरा हो गया और सरकार ने उन्हें ही प्रशासनिक काम संभालने की अनुमति दे दी।
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर विवाद क्यों है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया था कि 57,694 पूर्व ग्राम प्रधान 27 मई 2026 से प्रशासक के रूप में काम करेंगे। इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई है क्योंकि UP पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के मुताबिक प्रधान का कार्यकाल सिर्फ 5 साल का होता है। साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना जरूरी है। सरकार का कहना था कि ऐसा कदम गांव के कामकाज में रुकावट न आए, इसलिए यह फैसला लिया गया।
कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग को क्या निर्देश दिए?
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस ए. के. चौधरी की बेंच ने इस मामले में सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव का पूरा शेड्यूल पेश करने को कहा है। इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पिछड़ा वर्ग आयोग (Backward Classes Commission) की रिपोर्ट 10 जुलाई तक जमा करें, ताकि OBC आरक्षण का मामला सुलझ सके और चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
प्रशासकों के पास क्या अधिकार रहेंगे?
सरकार के नियम के मुताबिक, ये प्रशासक अधिकतम छह महीने या नए चुनाव होने तक काम संभालेंगे। उन्हें केवल रोजमर्रा के काम देखने की अनुमति है। वे कोई भी बड़ी नीतिगत القرار (Policy Decision) नहीं ले सकते। अगर कोई जरूरी नीतिगत मामला आता है, तो उसे जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) से मंजूरी लेनी होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
UP में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल कब खत्म हुआ?
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का पांच साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था।
कोर्ट ने OBC आरक्षण रिपोर्ट कब तक मांगी है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट 10 जुलाई तक पेश करने का निर्देश दिया है।