UP में कलमी आम के पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, मलिहाबाद समेत आम उत्पादक इलाकों पर असर

UP/Lucknow : उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद समेत आम उत्पादक इलाकों में दशहरी जैसी कलमी प्रजाति के आम के पेड़ों को काटने पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से तीन हफ्ते के भीतर जवा

UP/Lucknow : उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद समेत आम उत्पादक इलाकों में दशहरी जैसी कलमी प्रजाति के आम के पेड़ों को काटने पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। यह आदेश 30 जुलाई 2026 को जारी किया गया है।

यह पूरा मामला साल 2013 में वकील जयंत सिंह तोमर द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। इस याचिका में यूपी के आम बेल्ट में पेड़ों की अंधाधुंध और अवैध कटाई का मुद्दा उठाया गया था। इससे पहले 4 जनवरी 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी हरे आम के पेड़ों को काटने पर रोक लगाई थी ताकि सड़क चौड़ीकरण और निजी कंपनियों द्वारा फल पट्टी क्षेत्रों में हो रही अवैध कटाई को रोका जा सके।

कोर्ट ने सरकार की ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए पहले भी कड़े कदम उठाए हैं। 7 जनवरी 2026 को राज्य सरकार पर 40,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। साथ ही वन विभाग के प्रधान सचिव, मुख्य वन संरक्षक, लखनऊ के प्रभागीय वनाधिकारी और उद्यान विभाग के प्रधान सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया था। यह कार्रवाई पेड़ों की जियो-टैगिंग और अवैध कटाई रोकने के निर्देशों की अनदेखी के कारण की गई थी।

पेड़ों को बचाने के लिए यूपी सरकार ने 27 फरवरी 2026 को आम और नीम समेत 29 मुख्य प्रजातियों के पेड़ों की कटाई पर लगी रोक को दो साल और बढ़ा दिया है, जो अब 2027 तक प्रभावी रहेगी। हालांकि, किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने कुछ नियम भी बनाए हैं। जनवरी 2025 के सरकारी आदेश के मुताबिक, बागान मालिक पुराने आम के पेड़ों के कायाकल्प के लिए उनकी छंटाई (Pruning) कर सकते हैं। इसके लिए वन विभाग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। छंटाई के लिए जड़ से करीब 3 मीटर की ऊंचाई पर पेड़ काटने और कटे हुए हिस्से पर फफूंदनाशक और चूना लगाने की सलाह दी गई है।

इन नियमों के बावजूद जमीन पर हालात अलग दिखते हैं। मई 2026 में मलिहाबाद में लकड़ी माफिया द्वारा कई फलदार पेड़ों को काटने की खबरें आईं। वहीं जुलाई 2026 में रामपुर में भी तीन दिनों तक लगातार पेड़ों की कटाई की गई, जिसमें वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठे। अब हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह इन बेशकीमती पेड़ों को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठा रही है।