UP: उत्तर प्रदेश के करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। UPPCL ने बिजली बिल में 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाने का आदेश दिया है, जिससे जून 2026 के बिल महंगे हो जाएंगे। इस फैसले के खिलाफ राज्य विद्
UP: उत्तर प्रदेश के करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। UPPCL ने बिजली बिल में 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाने का आदेश दिया है, जिससे जून 2026 के बिल महंगे हो जाएंगे। इस फैसले के खिलाफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अब नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाने जा रही है।
बिजली बिल में बढ़ोतरी क्यों हुई और कब से लागू होगा?
UPPCL ने 30 मई 2026 की रात को वितरण कंपनियों को निर्देश दिया कि वे मार्च 2026 के लिए 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज वसूलें। यह बढ़ोतरी FPPAS (फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) के तहत की गई है। उपभोक्ताओं को यह बढ़ा हुआ बिल जून 2026 के साइकिल में मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई 2026 में भी इसी तरह का 10 प्रतिशत सरचार्ज वसूला जा सकता है।
उपभोक्ता परिषद ने क्यों जताया विरोध?
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसे गलत बताया है। उनका कहना है कि बिजली कंपनियां पिछले दो साल के पुराने बकाये को बिल में जोड़कर बोझ बढ़ा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि UPERC द्वारा मंजूर बिजली खरीद दर 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने इसे 5.86 रुपये बताया, जिससे जनता पर करीब 1,610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। परिषद का तर्क है कि कंपनियों के पास पहले से ही 51,000 करोड़ रुपये का सरप्लस है।
स्मार्ट मीटर और बिजली नियमों में क्या बदलाव हुए?
UPERC ने 29 मई 2026 को बिजली वितरण के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब उपभोक्ताओं को यह अधिकार होगा कि वे अपनी पसंद के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुन सकें। यह अधिकार Electricity Act 2003 की धारा 47(5) के तहत दिया गया है। हालांकि, उपभोक्ता परिषद का कहना है कि कंपनियां नियमों का पालन नहीं कर रही हैं और 24 घंटे बिजली देने का वादा पूरा नहीं हो रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिजली बिल में 10% की बढ़ोतरी कब से दिखेगी?
UPPCL के आदेशानुसार, यह 10% फ्यूल सरचार्ज मार्च 2026 के लिए लगाया गया है, जो जून 2026 के बिजली बिल में जुड़कर आएगा।
क्या उपभोक्ता प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुन सकते हैं?
हाँ, UPERC के नए नियमों और Electricity Act 2003 के तहत अब उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के बीच चुनाव करने का अधिकार है।