UP में DL एजेंसियों का बड़ा खेल, दागी कर्मियों की भर्ती और वसूली पर FIR, CM ऑफिस तक पहुंचा मामला

UP/Lucknow : उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने वाली निजी एजेंसियों के कामकाज में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सिल्वर टच जैसी एजेंसियों पर दागी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने और आवेदकों से अवैध वसूली कराने के ग

UP/Lucknow : उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने वाली निजी एजेंसियों के कामकाज में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सिल्वर टच जैसी एजेंसियों पर दागी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने और आवेदकों से अवैध वसूली कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय और परिवहन मंत्री तक पहुंच चुका है, जिसके बाद विभाग ने जांच और FIR की कार्रवाई शुरू कर दी है।

ताजा मामला संभल ARTO का है, जहां सिल्वर टच एजेंसी के कंप्यूटर ऑपरेटर अंकित चौधरी पर एक आवेदक से 800 रुपये अतिरिक्त मांगने का आरोप लगा है। पीड़ित आदिल की शिकायत पर पुलिस ने अंकित चौधरी, बाबू विजय गुप्ता और दिनेश चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में पता चला है कि अंकित चौधरी पर पहले भी गाड़ी चोरी और धमकी देने जैसे दो आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इस घोटाले का असर केवल आवेदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसी के कर्मचारियों के साथ भी धोखाधड़ी हुई है। आरोप है कि स्वीकृत 75 पदों के मुकाबले 125 लोगों की भर्ती की गई और हर व्यक्ति से 3 से 4 लाख रुपये लिए गए। बाद में 25 लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया। सीतापुर, लखीमपुर, कानपुर, मथुरा, मेरठ, बलिया और अयोध्या जैसे जिलों के हटाए गए कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की है कि उनसे वसूली के लिए दबाव बनाया गया और बाद में उन्हें निकाल दिया गया।

परिवहन विभाग के अनुसार, एजेंसियों को एक स्मार्ट DL के लिए 45 रुपये मिलते हैं, जबकि लागत 60 रुपये आती है। इस वजह से होने वाले करीब 30 लाख रुपये के मासिक घाटे को पूरा करने के लिए कर्मचारियों पर आवेदकों से वसूली करने का दबाव डाला जा रहा था।

अपर परिवहन आयुक्त (IT) विजय कुमार सिंह ने बताया कि कंपनियों के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। परिवहन मंत्री के निर्देश के बाद सिल्वर टच एजेंसी के प्रतिनिधियों, जिनमें द्युष्यंत सिंह, श्याम मोहन अग्निहोत्री और प्रेम प्रकाश सिंह के नाम शामिल हैं, से पूछताछ होने की संभावना है। फिलहाल जांच एजेंसियां उन कर्मचारियों से संपर्क कर रही हैं जिन्हें नौकरी से निकाला गया था ताकि सबूत जुटाए जा सकें।