UP : बरेली की आंवला तहसील के भमोरा में प्रशासन ने 20 मई 2026 को करीब दो दर्जन ग्राम प्रधानों को लखनऊ जाने से रोक दिया। ये प्रधान अपनी मांगों और पंचायतों के अधिकारों को लेकर लखनऊ में होने वाले एक सम्मेलन में शामिल होने जा
UP : बरेली की आंवला तहसील के भमोरा में प्रशासन ने 20 मई 2026 को करीब दो दर्जन ग्राम प्रधानों को लखनऊ जाने से रोक दिया। ये प्रधान अपनी मांगों और पंचायतों के अधिकारों को लेकर लखनऊ में होने वाले एक सम्मेलन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने इन्हें रोककर ब्लॉक सभागार में बैठाया, जिसे प्रधानों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।
ग्राम प्रधानों को क्यों रोका गया और उनकी मांग क्या है?
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है। उनकी मुख्य मांग है कि या तो समय पर चुनाव कराए जाएं या फिर चुनाव होने तक निर्वाचित प्रधानों को ही प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के साथ कार्यवाहक प्रशासक घोषित किया जाए। इसी मुद्दे पर वे लखनऊ जा रहे थे, लेकिन पंचायती राज मंत्री के आह्वान पर पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। बाद में इन प्रधानों को रिहा कर दिया गया।
अन्य जिलों में क्या कार्रवाई हुई और सरकार का क्या कहना है?
सिर्फ आंवला ही नहीं, बल्कि फरीदपुर में भी प्रधान संगठन के अध्यक्ष को 20 मई को घर में नजरबंद कर दिया गया था। इससे पहले 18 मई को लखनऊ के GPO पार्क में ‘लोकतंत्र बचाओ, पंचायत बचाओ’ के नारे के साथ बड़ा प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें मिठाई खिलाकर भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी और उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्राम प्रधान लखनऊ में किस बात का विरोध कर रहे थे?
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। वे समय पर पंचायत चुनाव कराने या चुनाव तक खुद को प्रशासक नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं।
बरेली प्रशासन ने ग्राम प्रधानों के साथ क्या कार्रवाई की?
20 मई 2026 को भमोरा में करीब दो दर्जन ग्राम प्रधानों को लखनऊ जाने से रोका गया और उन्हें ब्लॉक सभागार में बैठाया गया।