UP में आयुष्मान कार्डधारकों को बड़ी राहत, अब लखनऊ जाने की जरूरत नहीं, जिला स्तर पर ही सुलझेंगी समस्याएं
UP: उत्तर प्रदेश के उन लोगों के लिए अच्छी खबर है जिनके आयुष्मान कार्ड में कोई समस्या आ रही थी। अब कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन या कार्ड डिसेबल होने जैसी दिक्कतों को दूर करने के लिए मरीजों और उनके परिवार को राजधानी लखनऊ के
UP: उत्तर प्रदेश के उन लोगों के लिए अच्छी खबर है जिनके आयुष्मान कार्ड में कोई समस्या आ रही थी। अब कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन या कार्ड डिसेबल होने जैसी दिक्कतों को दूर करने के लिए मरीजों और उनके परिवार को राजधानी लखनऊ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब इन सभी समस्याओं का समाधान सीधे जिला स्तर पर ही किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs), नोडल आयुष्मान अधिकारियों और जिला कार्यान्वयन इकाई की टीमों को विशेष तकनीकी आईडी दी गई है। इससे अब जिला स्तर के अधिकारी ही कार्ड से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को तुरंत हल कर सकेंगे। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SACHIS) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि इस कदम का मकसद यह है कि पात्र लोगों को बिना किसी परेशानी के समय पर मुफ्त इलाज का लाभ मिल सके।
योजना को और बेहतर बनाने के लिए 19 जून 2026 को नए नियम जारी किए गए। अब आयुष्मान कार्ड में नाम, जन्मतिथि और पते जैसी गलतियों को आसानी से सुधारा जा सकेगा, ताकि 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज में कोई रुकावट न आए। साथ ही, प्रदेश में 15 मई से 14 अगस्त 2026 तक आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए एक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।
दूसरी तरफ, सरकार ने योजना में धांधली रोकने के लिए सख्ती भी बरती है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में नियमों का उल्लंघन करने वाले करीब 200 अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा, करीब 300 अस्पतालों पर गलत तरीके से भुगतान लेने का शक है, जिनकी जांच के लिए नोटिस जारी किए गए हैं और फील्ड ऑडिट किया जा रहा है। यूपी में दावों के निपटारे का औसत समय 57 दिन है, जो कि देश के औसत समय 73 दिन से काफी कम और बेहतर है।