Delhi: 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद ने एक बार फिर अंतरिम जमानत की मांग की है। उन्होंने इसके लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इससे पहले एक निचली अदालत ने उनकी 15 दिनों की अस्थायी रिहाई क
Delhi: 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद ने एक बार फिर अंतरिम जमानत की मांग की है। उन्होंने इसके लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इससे पहले एक निचली अदालत ने उनकी 15 दिनों की अस्थायी रिहाई की अर्जी को खारिज कर दिया था। अब इस मामले की सुनवाई 22 मई 2026 को होने की उम्मीद है।
उमर खालिद ने जमानत के लिए क्या कारण दिए?
उमर खालिद ने अपनी याचिका में बताया कि उन्हें अपने मामा की 40वीं (चेहलुम) की रस्म में शामिल होना है। इसके अलावा, उनकी 62 साल की मां की 2 जून 2026 को ‘लंप एक्साइज’ सर्जरी होनी है, जिसकी देखभाल के लिए उनका घर पर होना जरूरी है। उनके वकीलों का कहना है कि खालिद का अपनी मां और मामा के साथ गहरा रिश्ता है, इसलिए उन्हें यह राहत मिलनी चाहिए।
निचली अदालत ने जमानत याचिका क्यों खारिज की?
करकडूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेई ने 19 मई 2026 को इस अर्जी को खारिज करते हुए इसे अनुचित बताया। कोर्ट ने कहा कि खालिद की मां की सर्जरी एक साधारण प्रक्रिया है और घर पर उनकी देखभाल के लिए पिता और पांच बहनें मौजूद हैं। वहीं, मामा की रस्म के मामले में कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर रिश्ता इतना करीबी होता, तो खालिद पहले ही रिहाई की मांग करते।
केस की मौजूदा स्थिति और कानूनी दलीलें
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अनिरुद्ध मिश्रा ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि खालिद इस छूट का गलत फायदा उठा सकते हैं। दूसरी तरफ, खालिद की कानूनी टीम का तर्क है कि जांच पूरी हो चुकी है और उनके बाहर आने से सबूतों के साथ छेड़छाड़ या भागने का कोई खतरा नहीं है। इस मामले की सुनवाई अब जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच करेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
उमर खालिद ने अंतरिम जमानत के लिए क्या वजह बताई है?
उमर खालिद ने अपने मामा की 40वीं की रस्म में शामिल होने और 2 जून को होने वाली अपनी मां की सर्जरी की देखभाल करने के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी है।
निचली अदालत ने जमानत देने से क्यों मना किया?
कोर्ट ने माना कि मां की सर्जरी एक साधारण प्रक्रिया है और घर पर अन्य सदस्य मौजूद हैं, साथ ही मामा की रस्म के लिए आवेदन करने में देरी को आधार बनाकर इसे अनुचित बताया।