Delhi: देश भर के विभिन्न आदिवासी समुदायों के लिए दिल्ली में ‘जनजातीय संस्कृति समागम’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को विशाखापट्टनम से एक स्पेशल ट्रेन फरीदाबाद रेलवे स्टेश
Delhi: देश भर के विभिन्न आदिवासी समुदायों के लिए दिल्ली में ‘जनजातीय संस्कृति समागम’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को विशाखापट्टनम से एक स्पेशल ट्रेन फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां से करीब 5,000 यात्रियों को बसों के जरिए दिल्ली भेजा गया। यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 500 से ज्यादा आदिवासी समुदायों के लगभग 1.5 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम की तैयारी और रूट क्या हैं?
दिल्ली के लाल किले परिसर में मुख्य कार्यक्रम होगा, जिसके लिए पांच अलग-अलग जगहों से सांस्कृतिक जुलूस निकलेंगे। ये जुलूस राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदसिया बाग और श्यामगिरि मंदिर से शुरू होकर लाल किले पर मिलेंगे। दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने रूट तय कर लिए हैं। गर्मी को देखते हुए पीने के पानी, टेंट और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रतिभागियों के रुकने के लिए दिल्ली में 78 अलग-अलग जगहें तय की गई हैं और 20 कमेटियां भोजन और मेडिकल सुविधाओं की देखरेख कर रही हैं।
ट्रैफिक और अन्य जरूरी जानकारियां
24 मई को दिल्ली की कई सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा। जी.टी. करनाल रोड, बुलेवार्ड रोड, श्यामनाथ मार्ग, लोथियन रोड, हैमिल्टन रोड, Shyama Prasad Mukherjee मार्ग और नेताजी सुभाष मार्ग पर ट्रैफिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और सभा को संबोधित करेंगे। फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए पानी के टैंकर और सफाई का खास इंतजाम किया गया था।
विवाद और विरोध की वजह क्या है?
इस आयोजन को लेकर राजनीतिक बहस भी छिड़ी हुई है। झारखंड कांग्रेस और कुछ आदिवासी कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया है। पूर्व मंत्री गीता श्री ओरांव और अन्य कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार की अपील की है। उनका आरोप है कि आयोजक आदिवासी पहचान को बदलने की कोशिश कर रहे हैं और ‘सरना-सनातन’ जैसे नारों के जरिए मूल पहचान को कम कर रहे हैं। वहीं, आयोजकों का कहना है कि इसका मकसद केवल आदिवासी संस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जनजातीय संस्कृति समागम कब और कहां आयोजित हो रहा है?
यह कार्यक्रम रविवार, 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किले परिसर में आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर के 500 से अधिक आदिवासी समुदायों के करीब 1.5 लाख लोग शामिल होंगे।
दिल्ली में किन रास्तों पर ट्रैफिक जाम या डायवर्जन हो सकता है?
24 मई को जी.टी. करनाल रोड, बुलेवार्ड रोड, श्यामनाथ मार्ग, लोथियन रोड, हैमिल्टन रोड और नेताजी सुभाष मार्ग जैसे प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक प्रतिबंध और डायवर्जन रहने की संभावना है।