Bhagalpur: TMBU में नियुक्ति नियमावली और नए विधेयक का विरोध, अतिथि शिक्षकों ने किया महाधरना
Bhagalpur: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एक बार फिर प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। सोमवार, 27 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन परिसर में अतिथि शिक्षकों ने ‘सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली
Bhagalpur: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एक बार फिर प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। सोमवार, 27 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन परिसर में अतिथि शिक्षकों ने ‘सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026’ और ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026’ के खिलाफ एक बड़ा महाधरना आयोजित किया। शिक्षकों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान टीएमबीयू के अलग-अलग कॉलेजों और पीजी विभागों के शिक्षकों ने अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कॉलेजों की स्वायत्तता खत्म करने की कोशिशों के विरोध में अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर काम किया। अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद और अन्य सदस्यों का आरोप है कि नई नियुक्ति नियमावली में UGC रेगुलेशन 2018 के नियमों को नजरअंदाज किया गया है।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मुख्य मांग है कि सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा को 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष किया जाए। साथ ही उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर, नेट, पीएचडी, शोधपत्र और अनुभव के आधार पर एपीआई (API) स्कोर प्रणाली लागू करने की मांग रखी है।
विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य प्रो. मुश्फिक आलम और सीनेट सदस्य डॉ. निर्लेश कुमार ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 से विश्वविद्यालयों की आजादी खत्म हो जाएगी और डिग्री कॉलेज सीधे सरकार के अधीन आ जाएंगे। पूर्व प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक सिंह और सिंडिकेट सदस्य डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा ने भी चेतावनी दी है कि इससे पूरे उच्च शिक्षा तंत्र पर बुरा असर पड़ेगा। इस आंदोलन में अतिथि शिक्षकों के अलावा तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ और बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ की टीएमबीयू इकाई भी शामिल रही।