Mumbai में चीन के नए कानून के खिलाफ तिब्बतियों का प्रदर्शन, चीनी दूतावास के बाहर जमकर लगाए नारे

Maharashtra: मुंबई में सोमवार, 3 अगस्त 2026 को तिब्बती युवाओं ने चीन के एक नए कानून के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। Tibetan Youth Congress के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने मुंबई स्थित चीनी दूतावास (Chinese consulate general

Maharashtra: मुंबई में सोमवार, 3 अगस्त 2026 को तिब्बती युवाओं ने चीन के एक नए कानून के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। Tibetan Youth Congress के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने मुंबई स्थित चीनी दूतावास (Chinese consulate general) के पास जमा होकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने चीन के ‘जातीय एकता और प्रगति कानून’ (Ethnic Unity and Progress Law) के खिलाफ नारे लगाए और अपना गुस्सा जाहिर किया।

चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने इस कानून को 12 मार्च 2026 को अपनाया था और यह 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू हो गया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा हस्ताक्षरित इस कानून का मकसद अल्पसंख्यक समुदायों की पहचान को बदलकर उन्हें चीनी संस्कृति में मिलाना है। इस कानून के तहत शिक्षा और सरकारी कामकाज में मंदारिन भाषा को प्राथमिकता दी जाएगी और तिब्बती बौद्ध धर्म समेत अन्य धर्मों पर सरकार की निगरानी बढ़ा दी जाएगी।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कानून चीन की सीमा के बाहर रहने वाले लोगों पर भी लागू होगा। अगर चीन सरकार को लगता है कि विदेश में बैठा कोई व्यक्ति ‘जातीय एकता’ को नुकसान पहुँचा रहा है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसी वजह से दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने इसकी कड़ी आलोचना की है।

सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि चेन्नई में भी करीब 100 तिब्बतियों ने शांति मार्च निकाला। ताइवान में भी बैंक ऑफ चाइना के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। यह पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब 2 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क में तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रंगज़ेन ने इसी कानून के विरोध में आत्मदाह कर लिया था। धर्मशाला से शुरू हुए भूख हड़ताल के अभियान के बाद अब भारत के अलग-अलग शहरों में यह विरोध देखा जा रहा है। हालांकि, भारत सरकार की नीति रही है कि तिब्बती लोग भारत की जमीन पर चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल न हों और किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर भारतीय कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है।