Thane में नगर निगम की अहम कमेटियां खाली, 6 महीने बाद भी नहीं हुई नियुक्तियां
Maharashtra/Thane: ठाणे नगर निगम (TMC) में पिछले छह महीनों से कामकाज का तरीका काफी उलझा हुआ है। जनवरी में नए हाउस के गठन के बाद भी अब तक एक भी स्पेशल कमेटी नहीं बनाई गई है। सबसे जरूरी स्टैंडिंग कमेटी और ट्रांसपोर्ट कमेटी
Maharashtra/Thane: ठाणे नगर निगम (TMC) में पिछले छह महीनों से कामकाज का तरीका काफी उलझा हुआ है। जनवरी में नए हाउस के गठन के बाद भी अब तक एक भी स्पेशल कमेटी नहीं बनाई गई है। सबसे जरूरी स्टैंडिंग कमेटी और ट्रांसपोर्ट कमेटी समेत कई अहम पद खाली पड़े हैं, जिससे शहर के विकास कार्यों और फैसलों पर असर पड़ रहा है।
नियमों के मुताबिक, नए हाउस के कार्यभार संभालने के कुछ ही हफ्तों के भीतर कमेटियों का गठन हो जाना चाहिए। इस मामले में फरवरी 2026 में एक प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस वजह से ठाणे शायद मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की इकलौती ऐसी बड़ी नगर पालिका बन गई है जहां इतने लंबे समय से मुख्य पद खाली हैं।
स्टैंडिंग कमेटी न होने की वजह से अब सभी जरूरी मंजूरियां सीधे जनरल बॉडी के पास जा रही हैं। 18 मार्च 2026 को हुई जनरल बॉडी मीटिंग में यह देखा गया कि पिछले चार साल के प्रशासनिक शासन के दौरान 265 प्रस्ताव पेंडिंग थे, जिन्हें मंजूरी के लिए रखा गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस स्थिति का फायदा शिव सेना उठा रही है क्योंकि जनरल बॉडी में उनका बहुमत है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ताधारी शिव सेना और उनके सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीटों के बंटवारे और आपसी खींचतान की वजह से यह देरी हो रही है। BJP नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर स्टैंडिंग और वार्ड कमेटियों के प्रभावशाली पदों से दूर रखा जा रहा है, जो कि एक गठबंधन साथी के तौर पर गलत है। वहीं, शिव सेना के नेताओं ने इन आरोपों को नकारा है और कहा है कि जल्द ही कमेटियों की घोषणा की जा सकती है।
वर्तमान में इन पदों की स्थिति इस प्रकार है:
| खाली पद/कमेटी | विवरण |
|---|---|
| स्टैंडिंग कमेटी | 16 सीटें खाली |
| ट्रांसपोर्ट कमेटी | गठन नहीं हुआ |
| वार्ड कमेटियां | 9 चेयरपर्सन के पद खाली |
| अन्य कमेटियां | स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, स्लम सुधार और महिला एवं बाल कल्याण |
| ट्री अथॉरिटी | पद खाली |
मार्च की मीटिंग के दौरान BJP और विपक्षी सदस्यों ने सरकार से यह भी मांगा कि पिछले चार साल के प्रशासनिक शासन में सरकारी फंड का इस्तेमाल कैसे हुआ, इसका पूरा हिसाब दिया जाए। फिलहाल शहर की जनता को इंतजार है कि कब ये कमेटियां बनेंगी ताकि स्थानीय समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके।