Maharashtra: ठाणे के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने एक डॉक वर्कर की मौत के मामले में मुआवजे की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि मृतक ने प्रतिबंधित इलाके में बिना अनुमति के प्रवेश किया था, जिसकी व
Maharashtra: ठाणे के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने एक डॉक वर्कर की मौत के मामले में मुआवजे की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि मृतक ने प्रतिबंधित इलाके में बिना अनुमति के प्रवेश किया था, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। इस मामले में मृतक के परिवार ने 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
हादसा कैसे हुआ और कोर्ट ने क्या कहा?
यह घटना साल 2019 की है, जो उरण के द्रोणागिरी स्थित एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) में हुई थी। 32 साल के किरण लहनु कोराडे एक डॉक वर्कर थे। वे बिना किसी सेफ्टी गियर के एक ऐसे इलाके में चले गए थे जिसे ‘नो मेन जोन’ कहा जाता है और वहां जाना सख्त मना था। कोर्ट ने कहा कि मृतक ने मशीनों से दूरी बनाए रखने की चेतावनी को नजरअंदाज किया, इसलिए इस हादसे के लिए वे खुद जिम्मेदार थे।
मुआवजा क्यों नहीं मिला?
ट्रिब्यूनल के सदस्य K.P. Shrikhande ने अपने आदेश में कुछ मुख्य बातें रखीं:
- मृतक प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस गया था, इसलिए उसे ‘ट्रेसपासर’ माना गया।
- भारी स्टैकर क्रेन चलाने वाले ऑपरेटर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह लगातार जमीन पर चलने वाले लोगों पर नजर रखे।
- बीमा कंपनी को भी जिम्मेदार नहीं माना गया क्योंकि क्रेन ऑपरेटर के ड्राइविंग लाइसेंस पर जरूरी एंडोर्समेंट नहीं था।
अब तक क्या भुगतान हुआ है?
कोर्ट के इस फैसले से पहले परिसर के मालिक ने मृतक के परिवार को 31 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। इसे ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट माना गया था। 8 अप्रैल 2026 को पारित इस आदेश की कॉपी सोमवार, 13 अप्रैल को सार्वजनिक की गई।