Telangana: हैदराबाद के एक छात्र ने IIM Mumbai की MBA एडमिशन प्रक्रिया को चुनौती दी थी, लेकिन तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि संस्थान अपनी चयन प्रक्रिया और सेक्शनल कट-ऑफ तय करने के
Telangana: हैदराबाद के एक छात्र ने IIM Mumbai की MBA एडमिशन प्रक्रिया को चुनौती दी थी, लेकिन तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि संस्थान अपनी चयन प्रक्रिया और सेक्शनल कट-ऑफ तय करने के लिए स्वतंत्र है। यह फैसला उन हजारों छात्रों के लिए अहम है जो प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए मैनेजमेंट कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं।
IIM Mumbai ने क्यों बदला कट-ऑफ और कोर्ट ने क्या कहा?
यह पूरा मामला CAT 2025 के स्कोर पर आधारित MBA प्रोग्राम (2026-28) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता Kataru Satya Sai का कुल परसेंटाइल 99.52 था, लेकिन वह Data Interpretation & Logical Reasoning (DI&LR) सेक्शन में फेल हो गए। उन्हें इस सेक्शन में 92.87 परसेंटाइल मिला था, जबकि जनरल कैटेगरी के लिए कट-ऑफ 93.50 तय किया गया था। जस्टिस Nagesh Bheemapaka ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ ओवरऑल स्कोर अच्छा होने से किसी को इंटरव्यू के लिए बुलाना जरूरी नहीं है, अगर वह सेक्शनल कट-ऑफ पार नहीं करता।
क्या संस्थान को हर रिजेक्ट हुए छात्र को जवाब देना होगा?
कोर्ट ने एक और जरूरी बात कही कि जब एडमिशन की प्रक्रिया बहुत बड़े स्तर पर होती है, तो संस्थान के लिए यह संभव नहीं है कि वह हर असफल उम्मीदवार को अलग से जवाब दे। कोर्ट ने माना कि IIM Mumbai की चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष थी। संस्थान ने स्पष्ट किया था कि आवेदकों की भारी संख्या को देखते हुए DI&LR सेक्शन के कट-ऑफ को बढ़ाया गया था।
केस से जुड़ी मुख्य जानकारियां
- याचिकाकर्ता: Kataru Satya Sai (हैदराबाद)
- संबंधित संस्थान: IIM Mumbai
- विवाद का कारण: सेक्शनल कट-ऑफ के कारण इंटरव्यू कॉल न मिलना
- कोर्ट का निर्णय: संस्थान के नियमों को सही माना और याचिका खारिज की
- मुख्य अधिकारी: डायरेक्टर Manoj Kumar Tiwari और चेयरमैन Shashi Kiran Shetty को पहले अवमानना नोटिस जारी हुए थे
Frequently Asked Questions (FAQs)
IIM Mumbai के इस केस में कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
कोर्ट ने IIM Mumbai के सेक्शनल कट-ऑफ नियम को सही ठहराया और छात्र की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक मानक तय करना एक्सपर्ट बॉडी का काम है और इसमें कोर्ट दखल नहीं देगा।
छात्र को इंटरव्यू के लिए क्यों नहीं चुना गया था?
छात्र का ओवरऑल CAT स्कोर 99.52 था, लेकिन DI&LR सेक्शन में उनका स्कोर 92.87 था, जो कि निर्धारित 93.50 परसेंटाइल की कट-ऑफ से कम था।