Maharashtra: टाटा ग्रुप के ट्रस्टीज़ की एक बेहद जरूरी मीटिंग शुक्रवार, 8 मई 2026 को होनी है। इस मीटिंग को रोकने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि Sir Ratan Tata Trust (S
Maharashtra: टाटा ग्रुप के ट्रस्टीज़ की एक बेहद जरूरी मीटिंग शुक्रवार, 8 मई 2026 को होनी है। इस मीटिंग को रोकने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि Sir Ratan Tata Trust (SRTT) महाराष्ट्र के नए कानून का पालन नहीं कर रहा है। अगर कोर्ट इस पर रोक लगाता है, तो Tata Sons के मैनेजमेंट से जुड़े बड़े फैसले अटक सकते हैं।
विवाद की असली वजह क्या है?
यह पूरा मामला महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट (सेकंड अमेंडमेंट) एक्ट, 2025 से जुड़ा है, जो 1 सितंबर 2025 से लागू हुआ था। इस कानून के सेक्शन 30A(2) के मुताबिक, किसी ट्रस्ट में लाइफ ट्रस्टीज़ (जीवनभर के ट्रस्टी) की संख्या कुल बोर्ड स्ट्रेंथ के 25% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। याचिकाकर्ता सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े का कहना है कि SRTT में 6 ट्रस्टी हैं, जिनमें से 3 लाइफ ट्रस्टी हैं। यह कुल संख्या का 50% होता है, जो कानूनन गलत है।
मीटिंग में क्या होने वाला था और कोर्ट का क्या फैसला है?
इस मीटिंग में Tata Sons के बोर्ड में ट्रस्टीज़ के प्रतिनिधित्व पर चर्चा होनी थी। साथ ही, वेणु श्रीनिवासन को बोर्ड से हटाकर उनकी जगह भास्कर भट को लाने पर विचार किया जा सकता था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया है। दूसरी तरफ, टाटा ट्रस्ट्स ने पहले ही कोर्ट में एक ‘कैविएट’ दाखिल कर दी है ताकि किसी भी फैसले से पहले उनकी बात सुनी जा सके।
कौन-कौन हैं इस मामले से जुड़े मुख्य लोग?
| भूमिका |
नाम/संस्था |
| याचिकाकर्ता |
सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े |
| प्रतिवादी |
महाराष्ट्र सरकार, चैरिटी कमिश्नर, SRTT |
| मुख्य ट्रस्टीज़ |
नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह, जिमी एन टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर, डेरियस खंबाता |
| कानूनी राय |
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कृष्णा मुरारी |
Frequently Asked Questions (FAQs)
SRTT पर कानून उल्लंघन का आरोप क्यों लगा है?
आरोप है कि SRTT में लाइफ ट्रस्टीज़ की संख्या 50% (3 में से 6) है, जबकि महाराष्ट्र के नए कानून के तहत यह सीमा अधिकतम 25% होनी चाहिए।
क्या बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीटिंग पर रोक लगा दी है?
नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिलहाल इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिससे मीटिंग पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगी है।