विदेशों में पासपोर्ट और वीजा सेवाओं पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रखा बरकरार

Delhi: विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए पासपोर्ट और वीजा सेवाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है, जिसमें विदेश मंत्रालय (MEA) क

Delhi: विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए पासपोर्ट और वीजा सेवाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है, जिसमें विदेश मंत्रालय (MEA) के टेंडर प्रोसेस को रद्द कर दिया गया था। यह मामला अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा में स्थित भारतीय मिशनों से जुड़ा है।

पूरा मामला यह है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को इन चार देशों में काउंसलर, पासपोर्ट और वीजा (CPV) सेवाओं के आउटसोर्सिंग टेंडर की तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि विदेश मंत्रालय की यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसमें मनमानी की गई, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। केंद्र सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

20 जुलाई 2026 को चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह ध्यान रखा कि इससे विदेशों में भारतीयों के जरूरी काम न रुकें। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक पुराने सर्विस प्रोवाइडर काम जारी रख सकते हैं या फिर L-1 बिडर्स को अस्थायी तौर पर काम दिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करे और अगले तीन महीने के भीतर नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया पूरी करे। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि हाई कोर्ट के फैसले से विदेशों में भारतीय मिशनों का कामकाज प्रभावित हुआ है। गौरतलब है कि इस कानूनी विवाद की वजह से VFS Global ने 1 जुलाई से ऑस्ट्रेलिया में नए पासपोर्ट और वीजा आवेदन लेना बंद कर दिया था।