Lucknow, Patna समेत कई शहरों की अवैध इमारतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

UP/Lucknow: लखनऊ, पटना, दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों में बन रही अवैध और असुरक्षित इमारतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के बड़े अधिकारियों से पूछा है कि अब तक इन

UP/Lucknow: लखनऊ, पटना, दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों में बन रही अवैध और असुरक्षित इमारतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के बड़े अधिकारियों से पूछा है कि अब तक इन ढांचों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने साफ कहा है कि केवल बिल्डरों को पकड़ना काफी नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी जिन्होंने इन अवैध निर्माणों को मंजूरी दी।

9 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश दिया कि उन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम उजागर किए जाएं जिनकी लापरवाही की वजह से शहर में असुरक्षित इमारतें खड़ी हो गईं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सीधे तौर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) और कमिश्नरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके साथ ही आदेश न मानने वालों के खिलाफ अवमानना (contempt) की कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है।

अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अधिकारी केवल हादसे के बाद बिल्डरों को गिरफ्तार करके अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दिखावा करते हैं। कोर्ट ने 20 मई 2026 के अपने पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि अवैध निर्माणों को तुरंत सील या ध्वस्त किया जाना चाहिए। इस मामले में IIT Delhi की एक स्पेशल टीम बनाई गई है, जो लखनऊ के अलीगंज और दिल्ली के मालवीय नगर, साकेत और लाजपत नगर जैसे इलाकों में जमीनी सर्वे करेगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा। दिल्ली नगर निगम (MCD) की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय ने कोर्ट को बताया कि कुछ काम हुए हैं और विस्तृत रिपोर्ट 4 अगस्त से पहले जमा कर दी जाएगी। कोर्ट ने यह सख्त कदम दिल्ली के साकेत में इमारत गिरने और लखनऊ के अलीगंज व दिल्ली के मालवीय नगर में लगी आग जैसी दुखद घटनाओं के बाद उठाया है।