Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। अब कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों को न्यूनतम अटेंडेंस के बिना परीक्षा देने से
Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। अब कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों को न्यूनतम अटेंडेंस के बिना परीक्षा देने से रोका जाएगा। कोर्ट ने माना कि इस तरह की छूट से कॉलेजों में अनुशासनहीनता बढ़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा और क्या है नया नियम
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अगर छात्र क्लास में नहीं आएंगे, तो शिक्षकों का क्या होगा। अदालत ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट के पुराने आदेश को छात्र क्लास से बचने के लिए एक ‘फ्री पास’ की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों का सख्ती से पालन होगा, जिसके तहत कानून के छात्रों के लिए कम से कम 70% अटेंडेंस होना जरूरी है। विशेष मामलों में इसे 65% तक किया जा सकता है।
दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला क्यों बदला गया
इससे पहले नवंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि केवल कम अटेंडेंस के कारण किसी छात्र का भविष्य बर्बाद नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने मूट कोर्ट और सेमिनार में बिताए समय को भी उपस्थिति में जोड़ने की बात कही थी। हालांकि, BCI ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस फैसले से National Law Universities (NLUs) और अन्य विधि कॉलेज काफी परेशान थे। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने भी दलील दी कि इससे छात्रों में अनुशासन खत्म हो रहा है।
आगे क्या होगा और अगली सुनवाई कब है
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यह आदेश भविष्य के लिए लागू होगा। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई, 2026 को तय की गई है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों के हाई कोर्ट अपनी उपस्थिति संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई जारी रख सकते हैं। यह मामला 2016 में सुशांत रोहिल्ला नाम के एक छात्र की आत्महत्या के बाद दायर की गई जनहित याचिका से जुड़ा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कानून के छात्रों के लिए कितनी अटेंडेंस जरूरी है
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के 2008 के नियमों के मुताबिक, कानून के छात्रों के लिए न्यूनतम 70% उपस्थिति अनिवार्य है। कुछ खास मामलों में इसे 65% तक कम किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कब से लागू होगा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसका यह आदेश भविष्य में लागू होगा और इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई, 2026 को होगी।