MEA के पासपोर्ट और वीजा टेंडर मामले में केंद्र को झटका, Supreme Court ने खारिज की याचिका

Delhi: विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा चार भारतीय मिशनों में पासपोर्ट, वीजा और कांसुलर सेवाओं के लिए निकाले गए टेंडर मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को केंद्र की उस याचिका क

Delhi: विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा चार भारतीय मिशनों में पासपोर्ट, वीजा और कांसुलर सेवाओं के लिए निकाले गए टेंडर मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को केंद्र की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने पहले ही इस टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया था।

यह पूरा मामला अबू धाबी (UAE), कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) स्थित भारतीय मिशनों से जुड़ा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को अपने फैसले में कहा था कि MEA की तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और यह मनमाना था। कोर्ट ने माना कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और जनरल फाइनेंशियल रूल्स 2017 के नियमों का उल्लंघन करती है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, जबकि केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने केंद्र की याचिका तो खारिज कर दी, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 101 में कुछ बदलाव किए हैं।

कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक, जब तक नए RFP (Request for Proposal) जारी नहीं होते और काम दोबारा नहीं बांटा जाता, तब तक केंद्र सरकार और MEA पुराने सर्विस प्रोवाइडर्स की सेवाएं जारी रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करे और अगले तीन महीने के भीतर नई टेंडर प्रक्रिया पूरी करे।

इसके अलावा, MEA उन L-1 बिडर्स को भी अस्थायी रूप से काम दे सकता है जिनके आवंटन को हाई कोर्ट ने रद्द किया था, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह से मंत्रालय के अपने जोखिम पर होगी। कोर्ट ने साफ किया कि यह अंतरिम व्यवस्था केवल अस्थायी है और इससे किसी भी पार्टी को भविष्य की प्रक्रिया में कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा।