Maharashtra: सबूतों की कमी के चलते महिला के खिलाफ POCSO केस रद्द, Supreme Court ने कहा- आपसी रंजिश में कानून का इस्तेमाल गलत
Maharashtra: सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के खिलाफ दर्ज POCSO केस को पूरी तरह रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत ही नहीं हैं, तो महिला को आपराधिक मुकदमे से गुजारना बिल्कुल गलत है। य
Maharashtra: सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के खिलाफ दर्ज POCSO केस को पूरी तरह रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत ही नहीं हैं, तो महिला को आपराधिक मुकदमे से गुजारना बिल्कुल गलत है। यह फैसला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनाया।
यह मामला पुणे के खडकी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ा था। एक तलाकशुदा मां ने अपने बच्चों के पिता की बहन (बुआ) के खिलाफ IPC की धारा 354 और POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत मामला दर्ज कराया था। मामला बच्चों की कस्टडी को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि यह शिकायत तब की गई जब बच्चों के पिता ने पहले ही बच्चों के मामा के खिलाफ यौन शोषण की FIR दर्ज कराई थी। कोर्ट ने इसे एक-दूसरे से बदला लेने की कोशिश माना।
अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रवैये की भी आलोचना की, जिसने इस याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने बहुत ज्यादा तकनीकी रुख अपनाया और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को नहीं देखा। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि मजिस्ट्रेट के सामने बच्चे ने जो बयान दिया था, उसमें शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों का कोई समर्थन नहीं था।
जज ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अक्सर वैवाहिक विवादों में आपसी रंजिश निकालने के लिए ससुराल वालों को घसीटा जाता है और बच्चों का इस्तेमाल एक-दूसरे को बदनाम करने के लिए किया जाता है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि आपराधिक कानून को व्यक्तिगत हिसाब चुकता करने का हथियार नहीं बनाना चाहिए। महिला की तरफ से वकील सना रईस खान और धवाश ने पैरवी की थी।