Bihar में गंगा किनारे अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 6 हफ्ते में हटाने का आदेश

Bihar: पटना में गंगा नदी के किनारे किए गए अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को साफ निर्देश दिया है कि नौज़र घाट और नूरपुर घाट के बीच जितने भी अवैध ढांचे और अतिक्रमण हैं, उन्

Bihar: पटना में गंगा नदी के किनारे किए गए अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को साफ निर्देश दिया है कि नौज़र घाट और नूरपुर घाट के बीच जितने भी अवैध ढांचे और अतिक्रमण हैं, उन्हें छह हफ्ते के भीतर हटाया जाए। अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया है।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह आदेश 23 जुलाई, 2026 को सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह आदेश उन नियमों के तहत दिया गया है जो ‘गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016’ के तहत बनाए गए थे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी हाई कोर्ट या जिला अदालत ने अतिक्रमण हटाने पर कोई रोक लगाई है, तब भी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का पूरी तरह पालन करना होगा। याचिकाकर्ता अशोक कुमार सिन्हा ने पटना में गंगा किनारे सैकड़ों अवैध निर्माणों की बात कोर्ट के सामने रखी थी। इससे पहले 12 मार्च, 2026 को सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि दीघा घाट और नौज़र घाट के बीच 213 अतिक्रमणों में से केवल 58 ही हटाए गए थे।

बिहार सरकार को अब अगली सुनवाई तक एक सक्षम अधिकारी के जरिए हलफनामा देना होगा कि अतिक्रमण हटा दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार यह रिपोर्ट 23 सितंबर, 2026 तक जमा करनी होगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों से भी गंगा बेसिन में अतिक्रमण की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर राज्यों ने जानकारी नहीं दी, तो उनके मुख्य सचिवों को तलब किया जाएगा। साथ ही यूपी के वृंदावन में यमुना नदी के किनारे हो रहे नए निर्माणों पर भी रोक लगा दी गई है।