UP : नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट दखल दे रहा है। कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में आ
UP : नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट दखल दे रहा है। कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के WhatsApp ग्रुप में छिपकर एंट्री की और हिंसा भड़काने का काम किया ताकि असली मुद्दे को दबाया जा सके।
क्या है पूरा मामला और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
यह मामला 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में औद्योगिक मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि मजदूर वेतन चोरी के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने ‘एजेंट’ बनकर माहौल खराब किया। जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने साफ कहा कि बेहतर वेतन के लिए प्रदर्शन करना किसी को ‘आतंकवादी’ नहीं बनाता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में वामपंथी विचारधारा (Leftist ideology) रखना कोई अपराध नहीं है।
आरोपियों की हालत और पुलिस को चेतावनी
कोर्ट ने आरोपी आदित्य आनंद और रूपेश रॉय से सीधे बात की, जिन्होंने पुलिस हिरासत में प्रताड़ना और मारपीट के आरोप लगाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि मजदूरों और कार्यकर्ताओं के साथ ऐसा व्यवहार न करें। हालांकि, यूपी सरकार के वकील ने इन आरोपों को नकारा है और कहा है कि मेडिकल रिपोर्ट में कोई चोट नहीं मिली है। फिलहाल इन दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी और अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
FIR और विदेशी फंडिंग के दावे
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने एक ही विरोध प्रदर्शन को 14 अलग-अलग FIR में बांट दिया ताकि लोगों को बार-बार गिरफ्तार किया जा सके। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले की जांच CBI या SIT से कराने की मांग की है। दूसरी तरफ, गौतम बुद्ध नगर पुलिस का दावा है कि आरोपी सत्यम वर्मा के बैंक खाते में विदेशी देशों से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा आए हैं, जिसका इस्तेमाल प्रदर्शन कराने के लिए किया गया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को क्या चेतावनी दी है?
कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे आरोपी मजदूरों और कार्यकर्ताओं के साथ बुरा बर्ताव न करें और उन्हें प्रताड़ित न करें।
नोएडा हिंसा मामले की अगली सुनवाई कब है?
इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय की गई है।