Delhi: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मनमोहन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि कानून के क्षेत्र में AI की निगरानी के लिए संस्थागत ढांचे और जवाबदेही तय करने वाले कड़े नियमों क
Delhi: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मनमोहन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि कानून के क्षेत्र में AI की निगरानी के लिए संस्थागत ढांचे और जवाबदेही तय करने वाले कड़े नियमों की जरूरत है। ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने साफ किया कि AI चाहे कितना भी एडवांस हो जाए, आखिरी फैसला इंसान का ही होना चाहिए।
AI के इस्तेमाल में किन बातों का रखा जाएगा ध्यान
जस्टिस मनमोहन ने बताया कि भारत को अपनी जरूरतों के हिसाब से AI के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और चीन जैसे देशों के मॉडल को बिना सोचे-समझे नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने चीन की इंटरनेट कोर्ट में मानवीय संवेदनाओं की कमी और अमेरिका के COMPAS टूल में सामाजिक भेदभाव जैसी खामियों का जिक्र किया। उनका मानना है कि AI सिर्फ एक मददगार (Assistive) होना चाहिए, न कि फैसला सुनाने वाला (Determinative)।
सुप्रीम कोर्ट में AI के कौन से टूल्स इस्तेमाल हो रहे हैं
कोर्ट में कामकाज आसान करने के लिए कई AI टूल्स पर काम चल रहा है। इनमें क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के लिए SUVAS और दलीलों को टेक्स्ट में बदलने वाला सिस्टम शामिल है। इसके अलावा, भारतीय केस लॉ पर आधारित ‘LegRAA’ नाम का एक जनरेटिव AI टूल पायलट फेज में है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की ‘वन केस वन डेटा’ पहल और AI चैटबॉट ‘सु सहाय’ भी इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
भविष्य की तैयारी और यूनिवर्सिटीज की भूमिका
जज साहब ने कहा कि न्यायपालिका के भीतर क्षमता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने यूनिवर्सिटीज से अपील की कि वे AI के नैतिक, संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर नए कोर्स शुरू करें। इससे आने वाले समय में वकील और जज तकनीक का सही और सुरक्षित इस्तेमाल कर पाएंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सुप्रीम कोर्ट में AI के कौन से टूल्स का इस्तेमाल हो रहा है
कोर्ट में अनुवाद के लिए SUVAS, स्पीच-टू-टेक्स्ट सिस्टम, जनरेटिव AI टूल LegRAA और AI चैटबॉट ‘सु सहाय’ जैसे टूल्स का उपयोग किया जा रहा है।
जस्टिस मनमोहन ने AI को लेकर क्या मुख्य चेतावनी दी
उन्होंने कहा कि AI को फैसला सुनाने वाला नहीं बल्कि सिर्फ मददगार होना चाहिए और बिना जवाबदेही और निगरानी के इसका इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है।