UP, Delhi: गरीब लोगों के लिए उनका घर उनकी जिंदगी भर की कमाई और मेहनत का नतीजा होता है, लेकिन पिछले कुछ समय से ‘बुलडोजर जस्टिस’ के जरिए इसे चंद घंटों में ढहा दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते
UP, Delhi: गरीब लोगों के लिए उनका घर उनकी जिंदगी भर की कमाई और मेहनत का नतीजा होता है, लेकिन पिछले कुछ समय से ‘बुलडोजर जस्टिस’ के जरिए इसे चंद घंटों में ढहा दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे देश के लिए नए नियम जारी किए हैं, ताकि किसी भी व्यक्ति का घर बिना कानूनी प्रक्रिया के न तोड़ा जाए।
बुलडोजर एक्शन के लिए अब क्या हैं नए नियम?
सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को स्पष्ट किया कि प्रशासन जज बनकर किसी को सजा नहीं दे सकता। अब किसी भी अवैध निर्माण को गिराने से पहले कम से कम 15 दिन का नोटिस देना होगा। इस नोटिस में यह बताना जरूरी होगा कि निर्माण में क्या गलती है और उसे गिराने का आधार क्या है। साथ ही, मकान मालिक को अपनी बात रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का मौका देना होगा। अगर अधिकारी इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें संपत्ति का मुआवजा देना होगा।
किन राज्यों में ज्यादा हुए मकान ध्वस्त?
अम्नेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2022 के बीच असम, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में 128 संपत्तियां गिराई गईं, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय की थीं। इससे करीब 617 लोग प्रभावित हुए। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ बालकृष्णन राजगोपाल ने बताया कि 2022 से 2023 के बीच भारत में करीब 7.4 लाख लोगों ने सरकारी कार्रवाई के कारण अपने घर खो दिए।
UP सरकार ने कैसे लागू किए नए नियम?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 4 फरवरी 2025 को नए नियम लागू किए। अब राज्य में नोटिस भेजने, जवाब लेने और ध्वस्तीकरण के आदेशों को रिकॉर्ड करने के लिए एक डिजिटल पोर्टल बनाया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी भी व्यक्ति को बिना मौका दिए बेघर न किया जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या प्रशासन बिना नोटिस के मकान गिरा सकता है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों के मुताबिक, अब किसी भी अवैध निर्माण को गिराने से पहले 15 दिन का शो-कॉज नोटिस देना अनिवार्य है और व्यक्ति को सुनवाई का मौका देना होगा।
अगर नियमों के बिना घर गिराया गया तो क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों को संपत्ति की भरपाई (Restitution) और हर्जाना देना होगा।