GST ITC पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सप्लायर की गलती की सजा अब खरीदार को नहीं मिलेगी
Finance : जीएसटी विभाग अब किसी व्यापारी के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को सिर्फ इसलिए नहीं रोक पाएगा क्योंकि उसके सप्लायर ने टैक्स जमा नहीं किया या सप्लायर का रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैस
Finance : जीएसटी विभाग अब किसी व्यापारी के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को सिर्फ इसलिए नहीं रोक पाएगा क्योंकि उसके सप्लायर ने टैक्स जमा नहीं किया या सप्लायर का रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए विभाग के मनमाने रवैये पर रोक लगा दी है। अब अगर खरीदार ने लेन-देन के सभी सबूत पेश कर दिए हैं, तो उसे टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने ‘एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 2 बनाम एम/एस सेफकॉन लाइफसाइंस प्राइवेट लिमिटेड’ मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने साफ किया कि जीएसटी अधिनियम की धारा 74 का इस्तेमाल तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि खरीदार ने खुद धोखाधड़ी न की हो या जानबूझकर तथ्य न छिपाए हों। दिल्ली के एक पुराने डीवैट (DVAT) मामले में भी कोर्ट ने यही कहा था कि विक्रेता द्वारा टैक्स जमा न करने पर वास्तविक खरीदार को सजा नहीं दी जा सकती।
इस फैसले से उन हजारों व्यापारियों को राहत मिलेगी जो सप्लायर की गलती के कारण विभाग के नोटिस और कानूनी चक्करों में फंसे थे। अब विभाग को यह साबित करना होगा कि खरीदार की मंशा टैक्स चोरी की थी, तभी उसका आईटीसी रोका जा सकता है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कोर्ट का फैसला | सप्लायर की गलती पर खरीदार का ITC नहीं रुकेगा |
| धारा 74 का नियम | धोखाधड़ी या गलतबयानी के सबूत होने पर ही लागू होगा |
| जरूरी शर्त | खरीदार को लेन-देन की वास्तविकता साबित करनी होगी |
| प्रमुख केस | सेफकॉन लाइफसाइंस और शांति किरण इंडिया प्राइवेट लिमिटेड |
| प्रभावित क्षेत्र | दिल्ली, यूपी समेत पूरे देश के जीएसटी करदाता |
सीबीआईसी (CBIC) के पुराने दिशा-निर्देशों में भी यह बात कही गई थी कि आईटीसी को केवल संदेह के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों के आधार पर ही रोका जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप है, क्योंकि किसी व्यक्ति को दूसरे की गलती के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।