Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने एक विवादित पितृत्व मामले में मानवीय आधार पर बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक बच्ची की देखभाल और उसकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना सुनिश्चित करे। अदालत ने साफ क
Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने एक विवादित पितृत्व मामले में मानवीय आधार पर बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक बच्ची की देखभाल और उसकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना सुनिश्चित करे। अदालत ने साफ कहा कि पिता कौन है इस विवाद के बीच बच्ची के हक और उसके भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार को क्या निर्देश दिए?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश 21 अप्रैल 2026 को जारी किया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार बच्ची के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए जरूरी बुनियादी सामान और सुविधाएं उपलब्ध कराए। पीठ ने माना कि भले ही कानूनी लड़ाई चल रही हो, लेकिन बच्ची की सुरक्षा और कल्याण सबसे ऊपर है।
DNA रिपोर्ट और भरण-पोषण पर क्या कहा?
इस मामले में DNA रिपोर्ट के आधार पर कुछ अहम बातें सामने आईं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि DNA रिपोर्ट के वैज्ञानिक सबूतों के सामने पुराने कानूनी अनुमान काम नहीं करते। इस मामले की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- DNA रिपोर्ट में वह व्यक्ति बच्ची का जैविक पिता नहीं पाया गया।
- इसी आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया था।
- निचली अदालत और अपीलीय अदालत ने भी पहले भरण-पोषण की अर्जी खारिज की थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाई कोर्ट का फैसला त्रुटिपूर्ण नहीं था क्योंकि जैविक पिता की पुष्टि नहीं हुई थी।
बच्ची के भविष्य पर कोर्ट की चिंता क्यों?
कोर्ट ने यह महसूस किया कि अगर सिर्फ कानून के हिसाब से राशि तय की गई, तो भी बच्ची की मुश्किलें खत्म नहीं होंगी। इसी मानवीय चिंता के कारण सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को बीच में आने और बच्ची की जिम्मेदारी संभालने को कहा है। यह फैसला उन मामलों के लिए मिसाल है जहां कानूनी विवादों के कारण बच्चों के बुनियादी अधिकार प्रभावित होते हैं।