Delhi, UP समेत 4 राज्यों में अवैध इमारतों पर SC सख्त, MCD अधिकारियों को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश
Delhi: देश में अवैध और खतरनाक इमारतों के बढ़ते मामलों को लेकर Supreme Court ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारियों को फटकार लगाई
Delhi: देश में अवैध और खतरनाक इमारतों के बढ़ते मामलों को लेकर Supreme Court ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारियों को फटकार लगाई है। अदालत ने इन अधिकारियों से उन इमारतों पर की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिनसे लोगों की जान को खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि रिपोर्ट में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर अगली सुनवाई तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संबंधित विभागों के CEO की जवाबदेही तय की जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन केवल हादसे या आग लगने के बाद बिल्डरों को पकड़ने का दिखावा करता है, जबकि उन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती जिन्होंने इन अवैध निर्माणों को मंजूरी दी या अनदेखा किया। कोर्ट ने इसे केवल ‘चेहरा बचाने की कवायद’ बताया है।
दिल्ली के संदर्भ में कोर्ट ने लापत नगर और सरोजिनी नगर जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन का जिक्र किया। इसके अलावा, 30 मई 2026 को Saidulajab इलाके में एक पांच मंजिला अवैध इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत और 14 लोग घायल हुए थे, जिसके बाद Amicus Curiae अजीत कुमार सिन्हा ने कोर्ट में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
स्थिति का सही आकलन करने के लिए कोर्ट ने एक स्पेशल टीम बनाई है। इस टीम में IIT Delhi के दो सीनियर प्रोफेसर और दो ड्राफ्ट्समैन शामिल हैं, जो साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर के इलाकों में समय सीमा के भीतर ग्राउंड सर्वे करेंगे। कोर्ट ने पहले ही 20 मई को अवैध निर्माणों को सील करने और गिराने के सख्त निर्देश दिए थे।