SpaceX का रॉकेट चाँद से टकराया, NASA ने कन्फर्म की घटना, अंतरिक्ष में बढ़ रहा है कचरा

World : अंतरिक्ष की दुनिया से एक बड़ी खबर आई है। एलन मस्क की कंपनी SpaceX का एक Falcon 9 रॉकेट हिस्सा चाँद की सतह से जा टकराया है। यह टक्कर 5 अगस्त 2026 को हुई, जिससे चाँद की सतह पर एक नया गड्ढा बन गया है। इस घटना ने एक

World : अंतरिक्ष की दुनिया से एक बड़ी खबर आई है। एलन मस्क की कंपनी SpaceX का एक Falcon 9 रॉकेट हिस्सा चाँद की सतह से जा टकराया है। यह टक्कर 5 अगस्त 2026 को हुई, जिससे चाँद की सतह पर एक नया गड्ढा बन गया है। इस घटना ने एक बार फिर अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे और कचरे की समस्या को चर्चा में ला दिया है।

यह रॉकेट हिस्सा असल में 15 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया था, जिसने Blue Ghost और Resilience जैसे लूनर लैंडर्स को अंतरिक्ष में भेजा था। मिशन पूरा होने के बाद यह ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही छूट गया था। SpaceX की डायरेक्टर जूलियाना शेमन ने बताया कि कंपनी ने नियमों के मुताबिक इसे सुरक्षित रखने की कोशिश की थी, लेकिन सूरज की गतिविधियों और ग्रेविटी की वजह से यह चाँद की ओर बढ़ गया।

NASA ने इस घटना की पूरी निगरानी की और पहले ही बता दिया था कि इसके चाँद से टकराने की 100% संभावना है। यह टक्कर चाँद के पिछले हिस्से में आइंस्टीन क्रेटर के पास हुई। टक्कर के समय रॉकेट की रफ्तार करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटा थी और इसका वजन लगभग 4,000 किलोग्राम था। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे 27 फीट चौड़ा और 5 फीट गहरा गड्ढा बना होगा, जिसमें करीब 1,100 टन मिट्टी और चट्टानें बाहर निकली होंगी।

इस घटना को ट्रैक करने के लिए दुनिया भर की वेधशालाओं ने कोशिश की। UAE की अल खतम ऑब्जर्वेटरी ने अबू धाबी से नजर रखी, लेकिन वहां से कोई रोशनी या धूल का बादल नहीं दिखा। वहीं, चिली के वेरी लार्ज टेलिस्कोप और एरिज़ोना की लोवेल ऑब्जर्वेटरी ने सोडियम और लिथियम गैस का एक गुबार देखा, जिससे टक्कर की पुष्टि हुई।

NASA अब अपने LRO और कोरिया के पाथफाइंडर लूनर ऑर्बिटर की मदद से इस जगह की तस्वीरें लेने की कोशिश कर रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक दुर्लभ मौका है जिससे वे चाँद की बनावट और कृत्रिम टक्करों के असर को समझ सकेंगे। हालांकि, इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है क्योंकि अंतरिक्ष में मलबे को ठिकाने लगाने के लिए अभी तक कोई सख्त नियम नहीं हैं। SpaceX अब भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए NASA के साथ मिलकर काम कर रहा है।