UP में ‘रावण राज’ का आरोप, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को भेजा कानूनी नोटिस

Lucknow: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी 81 दिनों की ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा’ पूरी कर वापस लखनऊ पहुंच गए हैं। लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस

Lucknow: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी 81 दिनों की ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा’ पूरी कर वापस लखनऊ पहुंच गए हैं। लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए और राज्य में ‘रावण राज’ जैसा माहौल होने का गंभीर आरोप लगाया।

शंकराचार्य ने बताया कि 3 मई 2026 को गोरखपुर से शुरू हुई यह यात्रा प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी। उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रा के दौरान उन्हें और उनके साथियों को काफी परेशान किया गया। कई जगहों पर रात रुकने की अनुमति नहीं मिली, जिसकी वजह से उन्हें सड़कों पर रात बितानी पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि 24 जुलाई के कार्यक्रम में आने वाले कार्यकर्ताओं को नजरबंद किया गया और उन्हें बुलडोजर कार्रवाई की धमकी दी गई। साथ ही कई इलाकों में बिजली काट दी गई।

इस विवाद के बीच शंकराचार्य ने 23 जुलाई 2026 को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस के जरिए उन्होंने ट्रस्ट से यह स्पष्ट करने को कहा है कि ‘स्वामी सरस्वती’ को समिति में किस आधार पर शामिल किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान हुई परेशानियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी लिखा है।

प्रशासनिक दिक्कतों की वजह से 24 जुलाई को आशियाना के कांशीराम स्मृति उपवन में होने वाला ‘गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्प’ कार्यक्रम अब बदल दिया गया है। यह आयोजन अब दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक डिजिटल माध्यम से होगा, जिसमें गौ रक्षा को लेकर आगे की रणनीति बताई जाएगी।

गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य का दावा विवादित है और सुप्रीम कोर्ट ने उनके पट्टाभिषेक पर रोक लगा रखी है। काशी विद्वत परिषद और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी उन्हें इस पद की मान्यता नहीं दी है। इससे पहले जनवरी 2026 में भी उन्होंने अपने पद के इस्तेमाल पर सवाल उठाने के मामले में यूपी सरकार को नोटिस भेजा था।