Lucknow में शंकराचार्य के कार्यक्रम को नहीं मिली अनुमति, अब डिजिटल माध्यम से करेंगे संबोधन
Lucknow: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अगली बार जब वे लखनऊ आएंगे, तो किसी अनुमति का इंतजार नहीं करेंगे। यह विवाद 24 जुलाई को होने वाले उनके
Lucknow: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अगली बार जब वे लखनऊ आएंगे, तो किसी अनुमति का इंतजार नहीं करेंगे। यह विवाद 24 जुलाई को होने वाले उनके एक सार्वजनिक कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ, जिसे प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी।
शंकराचार्य ने अपनी 81 दिनों की ‘गौ रक्षा यात्रा’ (गविष्ठि यात्रा) का समापन 22 जुलाई को गोरखपुर में किया था। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाय को ‘राष्ट्र माता’ या ‘राज्य माता’ का दर्जा दिलाना और गोहत्या पर पूरी तरह रोक लगाना था। इसके बाद 24 जुलाई को लखनऊ के आशियाना स्थित मान्यवर कांशी राम स्मृति उपवन में “गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्प” कार्यक्रम होना था।
शंकराचार्य का आरोप है कि उन्होंने महीनों पहले आवेदन किया था और 4.64 लाख रुपये से ज्यादा का शुल्क भी जमा किया था, लेकिन फिर भी समय पर अनुमति नहीं मिली। इस वजह से अब यह कार्यक्रम डिजिटल तरीके से होगा। शंकराचार्य दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच लखनऊ से उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लोगों को संबोधित करेंगे।
प्रशासनिक नियमों की बात करें तो लखनऊ में 21 मई से 19 जुलाई तक धारा 163 लागू थी, जिसमें सभाओं पर रोक थी, लेकिन शंकराचार्य का कार्यक्रम इस तारीख के बाद का था। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उनके समर्थकों को परेशान किया गया और कुछ कार्यकर्ताओं को ‘बुलडोजर’ की धमकी देकर घर में नजरबंद रखा गया।
शंकराचार्य ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा है। इसके अलावा उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे की अनियमितताओं पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार अपने हिसाब से “सरकारी शंकराचार्य” बनाना चाहती है। उन्होंने साफ किया कि गौ संरक्षण का यह अभियान अब रुकने वाला नहीं है और इसे प्रदेश की हर विधानसभा तक ले जाया जाएगा।