UP : शामली और आसपास के जिलों के कई ग्राम प्रधान अपने कार्यकाल को बढ़ाने की मांग को लेकर लखनऊ जाने की तैयारी में थे। सोमवार रात और मंगलवार सुबह पुलिस और प्रशासन ने इन्हें रास्ते में ही रोक लिया और कई प्रधानों को उनके घरों
UP : शामली और आसपास के जिलों के कई ग्राम प्रधान अपने कार्यकाल को बढ़ाने की मांग को लेकर लखनऊ जाने की तैयारी में थे। सोमवार रात और मंगलवार सुबह पुलिस और प्रशासन ने इन्हें रास्ते में ही रोक लिया और कई प्रधानों को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया। यह पूरी कार्रवाई लखनऊ में होने वाले एक बड़े प्रदर्शन को रोकने के लिए की गई है।
ग्राम प्रधानों को क्यों किया गया नजरबंद?
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई और 19 जुलाई 2026 को खत्म होने वाला है। उनका कहना है कि समय पर पंचायत चुनाव होना मुश्किल लग रहा है, इसलिए उनके कार्यकाल को बढ़ाया जाए। अगर सरकार प्रशासक नियुक्त करती है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान होगा और पैसों की गड़बड़ी हो सकती है। इसी मांग को लेकर वे लखनऊ जा रहे थे, जिसे रोकने के लिए प्रशासन ने कदम उठाए।
किन लोगों पर हुई कार्रवाई और क्या है प्रशासन का तर्क?
पुलिस ने भजू गांव के प्रधान संगठन अध्यक्ष बॉबी, चूनसा गांव के कोषाध्यक्ष नरेंद्र, लिलोन के जिला उपाध्यक्ष अंकुर और कुरमाली के बिल्लू प्रधान समेत कई लोगों को रोका। कन्नौज में भी जिला अध्यक्ष डॉ. चंद्रकांत यादव को नजरबंद किया गया। कोतवाली प्रभारी मयंक चौधरी ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया था ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े।
सरकार और प्रधानों के बीच अब तक क्या बातचीत हुई?
इससे पहले 18 मई 2026 को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रधानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। सरकार ने भरोसा दिलाया था कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी मामले समय पर पूरे किए जाएंगे। इसके अलावा 14 मई को प्रधानों ने एसडीएम अंकित कुमार के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा था, जिसमें मांग की गई थी कि चुनाव न होने पर चुने हुए प्रतिनिधियों को ही प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्राम प्रधानों की मुख्य मांग क्या है?
ग्राम प्रधान चाहते हैं कि उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए क्योंकि पंचायत चुनाव समय पर होने की उम्मीद कम है। वे चाहते हैं कि प्रशासकों की जगह निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही जिम्मेदारी मिले।
प्रशासन ने नजरबंद करने की कार्रवाई क्यों की?
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और शांति सुनिश्चित करने के लिए लखनऊ जाने वाले प्रधानों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था।