World : सऊदी अरब ने अपने रेगिस्तानों में रास्ता भटके यात्रियों की जान बचाने के लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। अल नफूद रेगिस्तान (Nafud Desert) में सौर ऊर्जा से चलने वाली लेज़र लाइटें लगाई गई हैं। ये लाइटें रात के
World : सऊदी अरब ने अपने रेगिस्तानों में रास्ता भटके यात्रियों की जान बचाने के लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। अल नफूद रेगिस्तान (Nafud Desert) में सौर ऊर्जा से चलने वाली लेज़र लाइटें लगाई गई हैं। ये लाइटें रात के अंधेरे में चमकती हैं और लोगों को पानी के स्रोतों और सुरक्षित ठिकानों तक पहुँचने में मदद करती हैं।
यह तकनीक कैसे काम करती है और किसने दिया विचार
इस पहल की शुरुआत अक्टूबर 2021 के आसपास हुई थी। पर्यावरण कार्यकर्ता मोहम्मद फोहैद अल-सोहैमान अल-रम्माली ने यह विचार दिया था। उन्होंने देखा था कि रेगिस्तान में कई लोग पानी के कुओं के पास होने के बावजूद उन्हें ढूंढ नहीं पाते और अपनी जान गंवा देते हैं। ये लेज़र बीकन दिन में सूरज की रोशनी से चार्ज होते हैं और रात में जलकर रास्ता दिखाते हैं। इन्हें इस तरह बनाया गया है कि रेगिस्तान की मुश्किल परिस्थितियों में भी ये काम कर सकें और इनमें ज्यादा रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ती।
कौन चला रहा है यह प्रोजेक्ट और कितनी लाइटें लगीं
इस पूरी परियोजना का प्रबंधन और समर्थन सऊदी अरब सरकार का पर्यावरण, कृषि और जल मंत्रालय (Ministry of Environment, Agriculture, and Water) कर रहा है। इस काम में एक विशेष कंपनी भी शामिल है। शुरुआत में 11 सोलर-पावर्ड लाइट बीकन लगाए गए थे। सरकार की योजना भविष्य में कम से कम 100 और बीकन लगाने की है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी अरब में सोलर लेज़र लाइट्स क्यों लगाई गईं?
ये लाइटें अल नफूद रेगिस्तान में रास्ता भटके यात्रियों को पानी के स्रोतों और सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने के लिए लगाई गई हैं, ताकि लोग प्यास या दिशा भटकने के कारण अपनी जान न गंवाएं।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कब हुई और किसने किया?
इसकी शुरुआत अक्टूबर 2021 के करीब हुई थी। इसका विचार पर्यावरण कार्यकर्ता मोहम्मद फोहैद अल-सोहैमान अल-रम्माली ने दिया था और इसे पर्यावरण, कृषि और जल मंत्रालय द्वारा संचालित किया जा रहा है।