Saudi Arabia और Houthis के बीच तनाव बढ़ा, Red Sea में जहाजों की आवाजाही रोकने की धमकी से दुनिया भर में बढ़ सकती है महंगाई

World: सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच टकराव एक बार फिर गहरा गया है। हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ ‘समुद्री नाकेबंदी’ (maritime embargo) का ऐलान किया है, जिसे सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन ब

World: सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच टकराव एक बार फिर गहरा गया है। हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ ‘समुद्री नाकेबंदी’ (maritime embargo) का ऐलान किया है, जिसे सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। इस विवाद का असर सीधे तौर पर दुनिया भर के व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे भारत जैसे देशों में भी असर दिख सकता है।

यह पूरा मामला 20 जुलाई 2026 को शुरू हुआ जब हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने सऊदी अरब के खिलाफ तत्काल प्रभाव से समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की। हूतियों का कहना है कि वे पिछले हफ्ते सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले और यमन की कथित घेराबंदी का बदला ले रहे हैं। हूतियों ने चेतावनी दी है कि अगर सऊदी अरब ने कोई भी गलत कदम उठाया तो वे इस टकराव को और बढ़ा देंगे।

दूसरी तरफ, 21 जुलाई को सऊदी अरब ने इस ऐलान की कड़ी निंदा की। सऊदी विदेश मंत्रालय ने हूतियों के दावों को गलत और भ्रामक बताया। सऊदी सरकार का कहना है कि वे यमन की जनता की मदद कर रहे हैं और 2012 से 2026 के बीच वहां 12.6 अरब डॉलर से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी है। सऊदी अरब ने साफ किया है कि वह अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जरूरी कदम उठाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Bab Al Mandeb जलडमरूमध्य (Strait) बंद होता है, तो यह वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा खतरा होगा। इससे सऊदी अरब के एशिया को होने वाले तेल निर्यात पर बुरा असर पड़ेगा। रिस्टैड एनर्जी के जॉर्ज लियोन के मुताबिक, करीब 25 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का निर्यात खतरे में पड़ सकता है। इस तनाव की वजह से जहाजों के बीमा प्रीमियम (War Risk Premiums) भी 0.3% से बढ़कर 0.75% हो गए हैं।

सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करें ताकि रेड सी में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे। फिलहाल सऊदी गठबंधन ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम शुरू कर दिए हैं और किसी भी खतरे का मजबूती से जवाब देने की बात कही है।