Saharsa में निजी क्लीनिक में बच्ची की मौत, जांच टीम बनी पर रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से उठे सवाल
Saharsa: सहरसा के बनगांव रोड पर स्थित एक निजी क्लीनिक में इलाज के दौरान 10 साल की बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके बाद सिविल सर्जन ने मामले की जांच के लिए तीन
Saharsa: सहरसा के बनगांव रोड पर स्थित एक निजी क्लीनिक में इलाज के दौरान 10 साल की बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके बाद सिविल सर्जन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बना दी है। हालांकि, अब इस जांच की पारदर्शिता को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा है।
जानकारी के मुताबिक, मृतक बच्ची का नाम काजल कुमारी था, जो महिषी थाना क्षेत्र के झाझा नवटोलिया की रहने वाली थी। 20 जुलाई 2026 की शाम को एक ऑपरेशन के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद काजल के पिता गंगा राम मुखिया और अन्य परिजनों ने क्लीनिक में जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके डर से डॉक्टर और स्टाफ वहां से फरार हो गए। सहरसा सदर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने जांच के लिए टीम तो गठित कर दी है, लेकिन लोगों का कहना है कि ऐसी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की जातीं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आएगी, तब तक यह सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा कम हो रहा है।
इलाके में अवैध और बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों की समस्या काफी पुरानी है। पहले भी जिला मजिस्ट्रेट दीपेश कुमार ने समीक्षा बैठक में सिविल सर्जन को ऐसे क्लीनिकों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी फर्जी अस्पतालों की एक लिस्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपी थी, लेकिन उन जांचों का नतीजा अब तक किसी को नहीं पता।
नियमों के मुताबिक किसी भी क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन के लिए फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल फिटनेस और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के मानकों को पूरा करना जरूरी होता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न तो नियमित जांच हो रही है और न ही निगरानी। वहीं, कई वैध क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करके बैठे हैं, लेकिन सरकारी विभाग की सुस्ती के कारण उन्हें मंजूरी मिलने में काफी देरी हो रही है, जिससे अवैध क्लीनिकों को बढ़ावा मिल रहा है।