Delhi के Safdarjung Hospital के डॉक्टरों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा- अस्पताल पुलिस चौकी नहीं इलाज की जगह होने चाहिए
Delhi: सफदरजंग अस्पताल और AIIMS के रेजिडेंट डॉक्टरों ने एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk के अस्पताल में भर्ती होने के तरीके और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। डॉक्टरों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर
Delhi: सफदरजंग अस्पताल और AIIMS के रेजिडेंट डॉक्टरों ने एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk के अस्पताल में भर्ती होने के तरीके और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। डॉक्टरों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस मामले में दखल देने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पतालों का इस्तेमाल कानून लागू करने वाली एजेंसियों के विस्तार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 18 जुलाई 2026 की सुबह पुलिस ने Sonam Wangchuk को जंतर मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। वह परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। डॉक्टरों के संगठन (RDA) ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि अस्पताल इलाज के केंद्र होते हैं और इन्हें हिरासत केंद्र की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। डॉक्टरों ने इस बात पर चिंता जताई कि अगर Wangchuk को उनकी इच्छा के बावजूद अस्पताल से जाने (LAMA) की अनुमति नहीं दी गई, तो यह उनके संवैधानिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
डॉक्टरों ने अस्पताल में की गई भारी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि ऐसी कड़ी सुरक्षा से मरीजों की देखभाल में दिक्कत आती है और आम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं पाना मुश्किल हो जाता है। इससे अस्पताल का माहौल ऐसा हो जाता है जैसे वह किसी पुलिस चौकी की तरह काम कर रहा हो। सफदरजंग और AIIMS के डॉक्टरों ने जंतर मंतर की घटना और अस्पताल में भर्ती करने की परिस्थितियों की एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है।
इस बीच, 21 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने Sonam Wangchuk की पत्नी की अपील को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में शिफ्ट करने की मंजूरी दी। इसके बाद 21 जुलाई की शाम 6:40 बजे उन्हें सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और गुरुग्राम के निजी Medanta Hospital में भर्ती कराया गया। हाई कोर्ट के इस फैसले ने उनके मौलिक अधिकारों को बरकरार रखा है।