Haryana और Delhi के बीच एक बड़ा कमाल हुआ है। रोहतक से दिल्ली तक 98 किलोमीटर का रास्ता सिर्फ 85 मिनट में तय कर एक धड़कता हुआ दिल पहुंचाया गया। इस तेज़ कार्रवाई की वजह से 26 साल के एक मरीज को नया जीवन मिला है। यह सब पुलिस
Haryana और Delhi के बीच एक बड़ा कमाल हुआ है। रोहतक से दिल्ली तक 98 किलोमीटर का रास्ता सिर्फ 85 मिनट में तय कर एक धड़कता हुआ दिल पहुंचाया गया। इस तेज़ कार्रवाई की वजह से 26 साल के एक मरीज को नया जीवन मिला है। यह सब पुलिस और डॉक्टरों की सटीक प्लानिंग और ग्रीन कॉरिडोर की वजह से मुमकिन हो पाया।
ग्रीन कॉरिडोर क्या है और कैसे काम करता है
ग्रीन कॉरिडोर ट्रैफिक पुलिस द्वारा बनाया गया एक खास रास्ता होता है। इसमें एम्बुलेंस के लिए ट्रैफिक सिग्नल मैनेज किए जाते हैं और जाम को पूरी तरह हटा दिया जाता है ताकि अंग परिवहन में एक सेकंड की भी देरी न हो। डॉक्टरों का कहना है कि अंगों को शरीर से निकालने के बाद उन्हें बहुत कम समय के भीतर ट्रांसप्लांट करना पड़ता है, वरना वे खराब हो सकते हैं।
किसे मिला कौन सा अंग और कहां हुआ ऑपरेशन
रोहतक के PGIMS अस्पताल में एक 37 साल के ब्रेन डेड व्यक्ति के परिवार ने अंगदान की सहमति दी थी। उनके अंगों से कई लोगों की जान बचाई गई है।
| अंग |
अस्पताल |
शहर |
| दिल (Heart) |
Fortis Escorts Heart Institute |
Delhi (Okhla) |
| फेफड़े (Lungs) |
Artemis Hospital |
Gurugram |
| लिवर और पैनक्रियाज |
AIIMS |
Delhi |
| किडनी और कॉर्निया |
PGIMS |
Rohtak |
मरीज की हालत और डॉक्टरों का क्या कहना है
दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में जिस 26 साल के युवक को दिल मिला है, वह Dilated Cardiomyopathy नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। डॉ. Z S Meherwal ने बताया कि इस ऑपरेशन की सफलता के लिए समय पर अंग का पहुंचना सबसे जरूरी था। फिलहाल मरीज ICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और डॉक्टर उसकी निगरानी कर रहे हैं।