Mumbai की भारी बारिश से Delhi की बूंदाबांदी तक, मानसून की यादों को Ranjit Lal ने शब्दों में पिरोया
India: मानसून भारत के लिए सिर्फ मौसम का बदलना नहीं है, बल्कि यह यादों, कुदरत के नजारों और एक बड़े उत्सव जैसा है। मशहूर लेखक Ranjit Lal ने indianexpress.com पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे बारिश हमारे
India: मानसून भारत के लिए सिर्फ मौसम का बदलना नहीं है, बल्कि यह यादों, कुदरत के नजारों और एक बड़े उत्सव जैसा है। मशहूर लेखक Ranjit Lal ने indianexpress.com पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे बारिश हमारे जीवन, संस्कृति और यादों का हिस्सा बन गई है।
लेखक के मुताबिक, मानसून का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे खान-पान, पहनावे, संगीत और त्योहारों को भी तय करता है। भारत में ओणम, तीज, रक्षाबंधन और नरली पूर्णिमा जैसे त्योहार बारिश के मौसम से ही जुड़े हैं, जिन्हें लोग दैवीय आशीर्वाद और खुशहाली के रूप में देखते हैं।
पुराने समय में लोग पक्षियों, जैसे कि कोयल और मेंढकों की आवाज सुनकर या आसमान के सितारों को देखकर बारिश के आने का अंदाजा लगाते थे। आज भी आम लोगों के लिए बारिश की बूंदों की आवाज और पकौड़ों जैसे गरमा-गरम नाश्ते का स्वाद पुरानी यादों को ताजा कर देता है।
Ranjit Lal ने अपने लेख में इस बात पर जोर दिया है कि मुंबई की मूसलाधार बारिश हो या दिल्ली की हल्की बूंदाबांदी, यह अनुभव हर भारतीय के दिल में एक खास जगह रखता है। उन्होंने बताया कि कैसे मानसून हमारी लोककथाओं और परंपराओं में रचा-बसा है और यह देश के अलग-अलग हिस्सों के परिदृश्य को पूरी तरह बदल देता है।