Jharkhand के रामगढ़ के आमों की विदेशों में बढ़ी मांग, UK और दुबई भेजी गई खेप

Jharkhand/Ramgarh: रामगढ़ के आम अब सिर्फ लखनऊ, गाजीपुर और बनारस तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। जून 2026 में रामगढ़ के आमों की डिमांड दुबई और यूनाइटेड किंगडम (UK) जैसे देश

Jharkhand/Ramgarh: रामगढ़ के आम अब सिर्फ लखनऊ, गाजीपुर और बनारस तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। जून 2026 में रामगढ़ के आमों की डिमांड दुबई और यूनाइटेड किंगडम (UK) जैसे देशों में काफी बढ़ गई है। जिला प्रशासन की मदद से यहां के किसानों के उत्पाद अब वैश्विक स्तर पर पहुंच रहे हैं।

11 जून 2026 को उपायुक्त ऋतुराज ने लगभग 2 टन आमों की खेप को UK के लिए हरी झंडी दिखाई। ये आम पतरातू, दुलमी और मांडू प्रखंड के किसानों ने उगाए थे। इससे पहले 5 और 6 जून को भी रामगढ़ से लगभग 8 टन अम्रपाली आम दुबई और अन्य विदेशी बाजारों के लिए भेजे गए। इन आमों को ‘रामगढ़ झारखंड अम्रपाली’ ब्रांड नाम से प्रमोट किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में मनोन्नति महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) और DRDB मनरेगा टीम ने बड़ी भूमिका निभाई, जिससे महिला किसानों की कमाई बढ़ी है।

दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के आम बाजारों का हाल अलग है। लखनऊ की मलिहाबाद मंडी में दशहरी आम की आवक तो है, लेकिन पैदावार कम होने से दाम बढ़ गए हैं। यहां अच्छी क्वालिटी का दशहरी आम 100 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। बुलंदशहर के बाजार में विभिन्न किस्में 30 से 70 रुपये प्रति किलो के बीच मिल रही हैं।

उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से इस बार आम की पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। हालांकि, खाड़ी देशों में यूपी के दशहरी और चौसा आमों की मांग हमेशा की तरह बनी हुई है। लखनऊ में स्थित 500 साल पुराना दशहरी आम का पेड़ आज भी फल दे रहा है, जिसे देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी आते हैं।