Ram Mandir चढ़ावा चोरी मामला: लखनऊ से दिल्ली तक मंथन, टिन्नू समेत कई लोगों पर जल्द कसेगा शिकंजा

UP: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे प्रकरण की जांच को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बड़े स्तर पर मंथन चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएग

UP: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे प्रकरण की जांच को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बड़े स्तर पर मंथन चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही इस मामले का सच सबके सामने आएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई SIT ने अपनी शुरुआती जांच पूरी कर ली है और रिपोर्ट शासन को सौंपी जा सकती है। कुछ खबरों के मुताबिक यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि अगले 15 दिनों के भीतर एसआईटी पूरी सच्चाई सामने ले आएगी। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि अगर किसी के पास इस मामले से जुड़े सबूत हैं, तो वे उन्हें एसआईटी को सौंपें।

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच CBI करे और CAG द्वारा ऑडिट कराया जाए। इस याचिका पर सोमवार, 22 जून 2026 को सुनवाई हो सकती है। एसआईटी ने एहतियात के तौर पर मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों को निर्देश दिया है कि वे जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ें।

जांच के दायरे में कई बड़े नाम और संदिग्ध लोग शामिल हैं:

नाम/इकाई भूमिका/आरोप
टिन्नू यादव ट्रस्ट महासचिव का पूर्व ड्राइवर और मुख्य संदिग्ध, जिसके पास दानपात्र की चाबियां थीं।
चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव, जिनसे एसआईटी ने पूछताछ की है।
अनिल मिश्रा ट्रस्टी, जिन पर 40% कमीशन लेने के आरोप लगे हैं।
गोपाल राव बिना ट्रस्टी हुए प्रबंधन में शामिल होने पर सवाल।
बैंककर्मी और गणनकर्ता लगभग 30 लोग जो दान की गिनती और बैंकिंग कार्य में शामिल थे।
SIT मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में जांच कर रही टीम।

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इस घटना को डाका बताया है। उन्होंने कहा कि भक्तों के विश्वास के साथ धोखा हुआ है और बैंककर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। उन्होंने यह भी बताया कि सीसीटीवी की केवल 45 दिनों की रिकॉर्डिंग ही उपलब्ध है।

जांच में यह भी सामने आया है कि रामलला के हार और चरण पादुका के साथ-साथ 60 किलो चांदी की शिलाएं भी गायब हैं। इन सबमें टिन्नू यादव की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अब जांच का दायरा 22 जनवरी 2024 की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हुई नियुक्तियों और सुरक्षा व्यवस्था तक बढ़ा दिया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा ढांचे में बड़े बदलाव होंगे और कुछ पदाधिकारियों को हटाया जा सकता है।